कचरा नहीं उठाया, डीजल बचाया… और नगर पालिका खुद को दे रही शाबाशी

Revanchal
5
3 Min Read

चार-पांच दिन बाद पहुंचती ओवरलोड कचरा गाड़ियां, पूरा शुल्क लेने के बावजूद गंदगी झेल रहे नागरिक

दैनिक रेवांचल टाइम्स सिवनी– नगर पालिका द्वारा हाल ही में डीजल बचत को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया, लेकिन शहर के विभिन्न वार्डों से सामने आ रही तस्वीर इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। नागरिकों का कहना है कि कई वार्डों में कचरा गाड़ियां नियमित रूप से नहीं पहुंच रहीं और अधिकांश स्थानों पर चार से पांच दिन बाद ही वाहन दिखाई देते हैं। वह भी अक्सर इतने भरे हुए होते हैं कि उनमें अतिरिक्त कचरा डालने की जगह नहीं बचती।

पूरा शुल्क, लेकिन अधूरी सुविधा

नगर पालिका घर-घर कचरा संग्रहण के नाम पर नागरिकों से नियमित रूप से शुल्क वसूल रही है, लेकिन सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हो रही। नतीजतन लोगों को कई दिनों तक घरों में कचरा जमा करके रखना पड़ता है, जिससे दुर्गंध, गंदगी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

डीजल में कटौती, गाड़ियां हुईं ओवरलोड

सूत्रों के अनुसार, पहले कचरा वाहनों को पर्याप्त डीजल दिया जाता था, जिससे वे वार्डों से कचरा एकत्र कर डंपिंग स्थल तक दो से तीन चक्कर लगा पाते थे। अब डीजल में कटौती के कारण वाहनों को अत्यधिक भरकर चलाया जा रहा है। ऐसे में गाड़ी वार्ड तक तो पहुंचती है, लेकिन उसमें अतिरिक्त कचरा लेने की क्षमता नहीं रहती।

गाड़ी आई, लेकिन कचरा नहीं उठा

वार्डवासियों का कहना है कि कई बार वाहन पहले से ही कचरे से लबालब भरे होते हैं। ऐसे में लोग कचरा डाल नहीं पाते और वाहन के आने के बावजूद वास्तविक रूप से कचरा संग्रहण नहीं हो पाता।

जिला अस्पताल की व्यवस्था भी प्रभावित

जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। पहले अस्पताल के लिए अलग से कचरा वाहन संचालित किया जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था बंद कर दी गई है। वार्डों से भरी हुई गाड़ियों को अस्पताल भेजे जाने से पूरा कचरा नहीं उठ पाता और परिसर में कई दिनों तक गंदगी बनी रहती है।

डीजल बचत या नागरिक सुविधाओं में कटौती?

जब कचरा गाड़ियां चार-पांच दिन बाद पहुंचें, डंपिंग स्थल तक कम चक्कर लगाएं और कई स्थानों से कचरा उठ ही न पाए, तो डीजल बचना स्वाभाविक है। लेकिन यदि यह बचत नागरिक सुविधाओं और स्वच्छता की कीमत पर हो रही है, तो इसे उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना उचित है या नहीं—यह सवाल अब आम नागरिक पूछ रहे हैं।

जनता का सीधा सवाल

जब पूरा शुल्क लिया जा रहा है, तो नियमित सेवा क्यों नहीं दी जा रही? और नागरिकों को गंदगी में छोड़कर बचाए गए डीजल पर आखिर किस बात की शाबाशी?

Share This Article
Translate »