जब घर के बाहर गांजा पीने वालों को टोकना गुनाह बन जाए, समझ लीजिए शहर बदमाशों के हवाले है…

Revanchal
3 Min Read

जबलपुर अब उस मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहां शरीफ आदमी का सबसे बड़ा अपराध सिर्फ इतना रह गया है कि उसने गलत चीज़ का विरोध क्यों किया। न्यू शोभापुर में जो हुआ, उसने पुलिस की चौकसी नहीं, बल्कि उसकी बेबसी का चेहरा सामने ला दिया।


एक बिल्डर ने घर के बाहर बैठे कुछ लड़कों से सिर्फ इतना कहा कि यहां गांजा मत पीओ…


बस… इतनी सी बात ने बदमाशों के अहंकार को चोट पहुंचा दी।
पहले धमकी दी गई। फिर पूरे इलाके की रेकी हुई। और उसके बाद रात के अंधेरे में फिल्मी अंदाज में स्कूटी पर आए नकाबपोश बदमाशों ने घर पर बम फेंक दिए। इतना ही नहीं, बाहर खड़ी कारों के कांच भी पत्थरों से चकनाचूर कर दिए।


सोचिए…
जिस शहर में बदमाश बम लेकर घूम रहे हों और उन्हें इस बात का भी डर न हो कि जिस घर को निशाना बना रहे हैं वहां एक अतिरिक्त जिला सूचना अधिकारी का परिवार रहता है, वहां आम आदमी आखिर खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेगा?


धमाके हुए… लोग दहशत में घरों से बाहर निकले… बच्चे सहम गए… महिलाएं चीख पड़ीं… लेकिन बदमाश आराम से भाग निकले।
और फिर एंट्री हुई पुलिस की… हमेशा की तरह घटना के बाद।


अब वही पुराना डायलॉग…
सीसीटीवी फुटेज देखी जा रही है…
आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा…
जबलपुर की जनता अब इन लाइनों को सुन-सुनकर लगभग कंठस्थ कर चुकी है। फर्क सिर्फ इतना रहता है कि हर बार वारदात बदल जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर में आखिर ऐसा माहौल बना किसने दिया, जहां गांजा पीने वालों को रोकना भी खतरे से खाली नहीं रहा? क्या बदमाशों को यकीन हो चुका है कि पुलिस सिर्फ घटनास्थल पर फोटो खिंचवाने और बयान देने तक सीमित रह गई है?


न्यू शोभापुर की यह घटना सिर्फ बमबाजी नहीं है, यह पुलिस व्यवस्था के मुंह पर पड़ा वह तमाचा है जिसकी आवाज पूरे शहर ने सुनी।
और सच तो यह है…
जिस शहर में बदमाश रेकी करके बम फेंक जाएं और पुलिस बाद में कैमरे खंगालती रह जाए, वहां कानून नहीं… बदमाशों का आत्मविश्वास चलता है।
मुहम्मद अनवार बाबू

Share This Article
Translate »