रेवांचल टाइम्स पन्ना
पन्ना। ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना के अंतर्गत खजुराहो-पन्ना रेल लाइन के रूट परिवर्तन को लेकर पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ गई हैं। जानकारी के अनुसार परियोजना के लिए पहले निर्धारित मार्ग पर अजयगढ़ क्षेत्र में 54 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। अब रूट बदलने के बाद नए प्रस्तावित मार्ग पर भी बड़ी संख्या में पेड़ों के कटने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार उत्तर वन मंडल पन्ना के अंतर्गत अजयगढ़ क्षेत्र में नए रेल मार्ग के लिए 31 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई की तैयारी चल रही है। वहीं परियोजना का प्रभाव पन्ना टाइगर रिजर्व तथा छतरपुर जिले के वन क्षेत्रों पर भी पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इससे क्षेत्र की जैव विविधता, वन संपदा और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो सकते हैं।
रेल प्रशासन का तर्क है कि रूट परिवर्तन का निर्णय ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने तथा संभावित दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि पर्यावरणविदों का मानना है कि पहले ही हजारों पेड़ों की कटाई हो चुकी है और अब नए मार्ग पर अतिरिक्त कटाई से पर्यावरणीय नुकसान और बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि Panna Tiger Reserve में वर्ष 2009 के बाद बाघ पुनर्वास अभियान को बड़ी सफलता मिली थी और वर्तमान में यहां बाघों की संख्या 100 से अधिक बताई जाती है। इसी क्षेत्र में Ken-Betwa Link Project के कारण भी वन क्षेत्र और वन्यजीवों पर प्रभाव को लेकर चर्चा होती रही है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से संबंधित सभी कार्य निर्धारित नियमों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत किए जा रहे हैं। वहीं विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने को लेकर क्षेत्र में बहस तेज हो गई है।
