बाबू ने अपने कार्यकाल में बनाई करोड़ो की संपति पत्नी और परिवार के नाम पर खरीदी संपति
विभाग के अधिकारी कर्मचारीयो की साठ गांठ से नहीं हो रही निष्पक्ष जांच अगर जांच हुई तो होगे बड़े खुलासे
प्रभारी मंत्री का नाम लेकर हुआ खेला बाबू का नाम पहली ट्रांसफर लिस्ट मे नाम होने बाद भी अधिकारियों ने लिस्ट से नाम गायब कर दिया वर्तमान मे पदस्थ उच्चाधिकारी की भूमिका संदिग्ध
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मध्यप्रदेश के मंडला जिले के पश्चिम सामान्य वन मण्डल से एक ऐसा मामला सामने आ रहा है जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों एवं शिकायतों के अनुसार ग्रेड थ्री बाबू स्वातंक चौरसिया के विरुद्ध शिकायतकर्ता राजेश जैन भारतीय मानवाधिकार परिषद जिलाध्यक्ष जबलपुर के द्वारा भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के आरोपों को लेकर माननीय राष्ट्रपति महोदय, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, वन विभाग मुख्यालय भोपाल तथा सीसीएफ जबलपुर तक शिकायतें भेजी गई हैं। इतना ही नहीं, 181 पर शिकायत एवं विभागीय जांच भी प्रचलित बताई जा रही है।जिसका शिकायत क्रमांक 35062519 दिनांक – 26/10/2025 है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है। कि जब शिकायतों और जांच का दायरा इतना व्यापक है, तब भी संबंधित कर्मचारी का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा?
क्या कारण है कि जांच के घेरे में आया कर्मचारी अपने पद एवं पश्चिम सामान्य वन मण्डल मंडला अंगद की तरह पैर जमा कर खड़ा हुआ है?
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग के अधिकारी पहले स्वातंक चौरसिया को हटाने के लिये तैयार थे। अचानक ऐसा कैसे हुआ कि जांच के दायरे मे आये कर्मचारी का प्रथम ट्रांसफर लिस्ट मे नाम था। लेकिन दूसरी लिस्ट से नाम गायब कर दिया गया है। और स्वतंक चौरसिया बाबू घूम घूम कर छाती ठोक रहा है। प्रभारी मंत्री का नाम लेकर सब को बता रहा है। कौन हटा सकता है। जिसमें बर्तमान मे पदस्थ उच्चाधिकारी की भूमिका संदिग्ध दिखाई दे रही है। क्योंकि उनका हिस्सा भी तो बधा है। वही गोपनीय जानकारी के अनुसार भी अवैध कमाई का हिस्सा भी अधिकारियों को देता है।जिसके कारण अधिकारी भी नहीं चाहते है। कि बाबू जी की कुर्सी जाएं।

शिकायत कर्ता राजेश जैन भारतीय मानवाधिकार परिषद जिलाध्यक्ष जबलपुर म. प्र.
शिकायतकर्ता के पास है। मजबूत दस्तावेज और प्रमाण जल्द ही अधिकारी और कर्मचारियों के कोर्ट जाने की तैयारी
क्या जांच निष्पक्ष रूप से हो पा रही है?
क्या गवाह और दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित हैं?
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ जिम्मेदार उच्चाधिकारी जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं तथा संबंधित कर्मचारी को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। यदि ऐसा है तो यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पूरे विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
वही दूसरी ओर विभाग में ईमानदारी से कार्य करने वाले कर्मचारियों के स्थानांतरण किए जा रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों और आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर नियम सबके लिए समान हैं या नहीं?
हम राज्य शासन, वन मंत्री, प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल तथा मुख्य वन संरक्षक जबलपुर से मांग करते हैं कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए तथा जांच अवधि में संबंधित कर्मचारी को प्रभाव क्षेत्र से पृथक किया जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई प्रश्न न उठे। उक्त विषय को लेकर जब शिकायतकर्ता राजेश जैन मध्यखबर पब्लिकेशन का अख़बार लेकर बर्तमान सी सी एफ़ बघेल से बात करने गए तो उन्होंने बात करने का समय देने से असमर्थता जताई और ऑफिस के बाहर निकल गए क्या ऐसे मे सी सी एफ़ महोदय जबलपुर की भूमिका पर भी संदेह नजर आता है
अब देखना यह होगा कि वन विभाग इन सवालों का जवाब देता है या फिर ये सवाल यूं ही फाइलों में दबकर रह जाएंगे। पूरी खबर शिकायतकर्ता की शिकायतों के आधार पर जांच के दायरे मे आये कर्मचारी का प्रथम ट्रांसफर लिस्ट मे नाम लेकिन सेकण्ड लिस्ट से नाम गायब जानकारी लेने पर प्रभारी मंत्री का नाम लेकर हुआ खेला, सूत्रों से प्राप्त खबर के अनुसार बर्तमान मे पदस्थ उच्चाधिकारी की भूमिका संदिग्ध और चौरसिया बाबू का बड़ा खेल है। और उसमें बड़े अधिकारी भी शामिल है। जिसके कारण आज तक स्वतंक चौरसिया को कोई नहीं हटा पाया है।
इनका कहना है।
मेरे द्वारा स्वतंक चौरसिया और तात्कालिक डी एफ ओ की शिकायत प्रधानमंत्री और वन विभाग के प्रमुख सचिव को शिकायत दर्ज करवाई गई थी। मगर अधिकारियों ने मामले को दबा दिया और प्रभारी मंत्री के आदेश होने के बाद भी स्वतंक चौरसिया का स्थानांतरण नहीं किया गया है।
राजेश जैन
शिकायतकर्ता
