
मुख्यालय की दोनों पंचायतों में जलसंकट प्रारंभ ,
दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – भीषण गर्मी ने तहसील मुख्यालय की दो ग्राम पंचायतों में जलसंकट को विकराल रूप दे दिया है। नल-जल योजना का बोर सूख जाने से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप्प हो गई है, जिससे लगभग 500 कनेक्शन प्रभावित हैं। हालत यह है कि सुबह से ही महिलाएं और पुरुष पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। कहीं हैंडपंप हवा उगल रहे हैं तो कहीं लाल पानी निकल रहा है।
जो हैंडपंप चालू हैं, वहां दिनभर लंबी कतारें लगी रहती हैं। कई लोग आधा से एक किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि कुछ परिवार निजी बोर से पैसे देकर पानी खरीद रहे हैं। नहाने और अन्य उपयोग के लिए लोगों को नदी का सहारा लेना पड़ रहा है। कुल मिलाकर, नगर में पानी के लिए जुगाड़ ही एकमात्र सहारा बन गया है।
तहसील मुख्यालय में भीषण गर्मी के चलते जलसंकट गहराता जा रहा है।नवीन नलजल योजना चालू होने में कई महीनों का वक्त लग सकता है वही नगर की वर्षों पुरानी नल-जल योजना का मुख्य बोर सूख जाने से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे नगर की दोनों ग्राम पंचायत—माल और रैयत—की लगभग पांच हजार आबादी प्रभावित हो रही है।
नल-जल सप्लाई बंद होने से लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। खासकर कबीर मोहल्ला, बनवासी मोहल्ला और रंजक मोहल्ला में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है। यहां के अधिकांश हैंडपंप या तो बंद हो चुके हैं या उनमें दूषित पानी निकल रहा है।
पांच साल से अधूरी योजना, पाइपलाइन जर्जर
रंजक मोहल्ला के ग्रामीणों भुनेश्वर बनवासी, शिवहरि साहू, संदीप रंजक और राजेंद्र कुमार रंजक ने बताया कि करीब पांच वर्ष पूर्व नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज तक सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है और कई स्थानों पर लीकेज है।
दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर लोग
रजक मोहल्ले के कई परिवार आधा किलोमीटर दूर चौधरी मोहल्ले के हैंडपंप से पानी लाकर गुजारा कर रहे हैं। वहीं नहाने और अन्य उपयोग के लिए चकरार नदी का सहारा लेना पड़ रहा है। जिनके पास निजी बोर नहीं है, वे पानी के लिए सबसे ज्यादा परेशान हैं। और पैसा खर्च कर निजी साधनों से पानी ले रहे है
एक हैंडपंप पर पूरे मोहल्ले की निर्भरता
ठाकुर देव मोहल्ले की गोमती बाई और जानकी बाई बताती हैं कि पूरे मोहल्ले में एक ही हैंडपंप चालू है, जहां दिनभर भीड़ लगी रहती है। घंटों इंतजार के बाद मुश्किल से पीने का पानी मिल पाता है।
कुआं जमीदोज, विकल्प खत्म
बाजार के नजदीक पीपल बाडी के बनवासी मोहल्ले के पास स्थित एकमात्र कुआं भी अब जमीदोज हो चुका है, जिससे जलस्रोतों के विकल्प लगभग समाप्त हो गए हैं। महिलाएं करीब 400 मीटर दूर मरखी तिराहा से पानी लाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि तेज गर्मी के कारण जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे बोर सूख गए हैं और एक सप्ताह से नल-जल सप्लाई बंद है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था कर जलसंकट से राहत दिलाई जाए।
