दैनिक रेवांचल टाईम्स – जबलपुर। परिवहन विभाग में कथित वसूली नेटवर्क को लेकर उठ रहे सवाल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं। सूत्रों के हवाले से बड़ी जानकारी सामने आ रही है कि विभाग का एक परिवहन आरक्षक इस पूरे प्रकरण की सबसे अहम कड़ी बनकर उभर रहा है—ऐसी कड़ी, जो खुली तो पूरा तंत्र बेनकाब हो सकता है।
अंदरखाने की जानकारी रखने वाले इस आरक्षक को लेकर जांच एजेंसियों की नजरें अब टिक चुकी हैं। माना जा रहा है कि यदि उससे सख्ती और निष्पक्षता के साथ पूछताछ की जाती है, तो कथित वसूली नेटवर्क की पूरी संरचना, उसके संचालन का तरीका और उसमें शामिल चेहरों की परत-दर-परत सच्चाई सामने आ सकती है।
मामले को और गंभीर बना रही हैं वे तस्वीरें और चर्चाएं, जिनमें विभागीय कर्मचारियों और बाहरी (प्राइवेट) व्यक्तियों के बीच कथित नजदीकियों के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं आधारों पर अब उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
फ्लाइंग टीम पहले से ही आरोपों के घेरे में रही है, लेकिन अब जो संकेत सामने आ रहे हैं, वे इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि मामला सिर्फ सतही नहीं, बल्कि गहराई तक फैले नेटवर्क का हो सकता है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि अगर जांच निष्पक्ष दिशा में आगे बढ़ी, तो कई ऐसे नाम सामने आ सकते हैं, जो अब तक पर्दे के पीछे थे।
इस बीच, फ्लाइंग प्रभारी राजेंद्र साहू को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों का दावा है कि बढ़ते दबाव के बीच वे तबादले की कोशिशों में जुटे हुए हैं। साथ ही यह भी चर्चाएं हैं कि कुछ स्तरों पर उन्हें राहत दिलाने की कोशिशें की जा रही हैं—हालांकि इन बातों की भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच एजेंसियां इस अहम कड़ी तक पहुंचकर सच्चाई बाहर ला पाती हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
