आंगनवाड़ी भर्ती में नियमों की अनदेखी का आरोपबीजेगांव मूल केंद्र में बाहरी नियुक्ति के प्रयास पर ग्रामीणों में आक्रोश

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स, नारायणगंज/मंडला।
जनपद पंचायत नारायणगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत मानेगांव के पोषक ग्राम बीजेगांव में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों पर भर्ती नियमावली की अनदेखी कर बाहरी महिला को नियुक्त करने के प्रयास के आरोप लग रहे हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों एवं आवेदिकाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।


ग्रामीणों के अनुसार बीजेगांव क्षेत्र में तीन अलग-अलग आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं—बीजेगांव मूल केंद्र, सिमरिया टोला और बैगाटोला। इनमें विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय की आबादी केवल बैगाटोला क्षेत्र में निवास करती है, जबकि बीजेगांव मूल केंद्र और सिमरिया टोला क्षेत्र में एक भी बैगा परिवार नहीं रहता। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा बीजेगांव मूल केंद्र में बाहरी क्षेत्र की बैगा महिला को नियुक्त करने के मौखिक प्रयास किए जाने की चर्चा जोरों पर है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की चयन नीति की कंडिका बी.1.2 में स्पष्ट उल्लेख है कि संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र के पोषक क्षेत्र की स्थायी निवासी महिला ही नियुक्ति के लिए पात्र होगी। शासन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समाज को प्राथमिकता अवश्य दी गई है, लेकिन यह प्राथमिकता उसी केंद्र तक सीमित है जहाँ उनका वास्तविक निवास एवं सामाजिक क्षेत्र मौजूद हो।


ग्रामीणों का आरोप है कि बीजेगांव मूल केंद्र में स्थानीय नियमों को दरकिनार कर बाहरी नियुक्ति का प्रयास स्थानीय योग्य महिलाओं के अधिकारों का सीधा हनन है। इस मामले में स्थानीय आवेदिका सविता मसराम सहित ग्रामीणों ने साफ कहा है कि उनका विरोध किसी समाज विशेष से नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी से है।


ग्रामीणों ने कहा—
“हम बैगा समाज के विरोधी नहीं हैं। बैगाटोला केंद्र में उनका पूरा अधिकार है और हम उसका सम्मान करते हैं। लेकिन बीजेगांव मूल केंद्र में जहां बैगा आबादी ही नहीं है, वहां बाहरी नियुक्ति करना स्थानीय महिलाओं के वैधानिक अधिकारों का हनन है। हम केवल न्याय और नियमों के पालन की मांग कर रहे हैं।”


मामले को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चा बनी हुई है। वहीं आवेदिका सविता मसराम एवं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर चयन सूची जारी की गई, तो वे पूरे मामले की लिखित शिकायत साक्ष्यों सहित कलेक्टर मंडला को सौंपेंगे।


अब देखना होगा कि महिला एवं बाल विकास विभाग इस मामले में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करता है या फिर भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल और गहरे होते जाएंगे।

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