अतिथि शिक्षकों के सब्र का बांध टूटा, सरकार के खिलाफ फूटा आक्रोश“हर साल पंजीयन का खेल, बेरोजगारों की नई फौज तैयार कर रही सरकार”

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्स – मण्डला। वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का बोझ उठाने वाले अतिथि शिक्षकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। प्रदेश व्यापी आवाहन पर मण्डला जिले के अतिथि शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अतिथि शिक्षक संगठन के जिला अध्यक्ष एवं समाजसेवी पी.डी. खैरवार ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बजाय हर साल “पंजीयन का नया खेल” खेल रही है और लाखों बेरोजगार युवक-युवतियों को झूठे सपने दिखाकर सिर्फ आंकड़ों की राजनीति कर रही है।


अतिथि शिक्षकों का कहना है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा जारी नए आदेशों में फिर नए आवेदकों के पंजीयन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जबकि हजारों अनुभवी अतिथि शिक्षक वर्षों से दर-दर भटकने को मजबूर हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब पहले से पंजीकृत और अनुभवी शिक्षक रोजगार के इंतजार में बैठे हैं तो आखिर सरकार को हर साल नए पंजीयन की जरूरत क्यों पड़ रही है?


ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सरकार एक तरफ युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ अतिथि शिक्षकों को अस्थायी व्यवस्था में उलझाकर उनका भविष्य अंधकार में धकेल रही है। कई अतिथि शिक्षक वर्षों तक स्कूलों में सेवाएं देने के बाद भी आज असुरक्षित और बेरोजगार हैं, लेकिन सरकार को उनकी चिंता नहीं दिखाई दे रही।


संगठन ने मांग की है कि पूर्व में पंजीकृत अतिथि शिक्षकों से दोबारा पंजीयन कराने की प्रक्रिया तत्काल बंद की जाए और केवल योग्यता अपडेट कराई जाए, ताकि उनकी वरिष्ठता प्रभावित न हो। साथ ही नए आवेदकों के पंजीयन पर रोक लगाकर पहले से पंजीकृत एवं काम से बाहर हुए अनुभवी अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए।


अतिथि शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि ऐसे “कष्टदायक और भ्रम फैलाने वाले आदेश” वापस नहीं लिए गए तो प्रदेशभर में विरोध और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था संभालने वाले अतिथि शिक्षक अब “आश्वासन नहीं, स्थायी रोजगार” चाहते हैं।

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