पांच पंचवर्षीय से एक ही परिवार का कब्जा,“विकास सिर्फ चहेतों तक सीमित”
रेवांचल टाइम्स मंडला जिला मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत देवदरा इन दिनों अव्यवस्थाओं और ग्रामीणों के आक्रोश का केंद्र बनी हुई है। पंचायत में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पंचायत के बीस वार्डो के कई के वार्डवासी मोहल्लों में रहने वाले सैकड़ों परिवार आज भी स्वच्छ पेयजल, सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग मजबूरी में दूषित पानी पीने को विवश हैं, लेकिन पंचायत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में पिछले पांच पंचवर्षीय से एक ही परिवार का दबदबा बना हुआ है। तीन बार पुरुष सरपंच और दो बार महिला सरपंच बनने के बाद भी गांव की तस्वीर नहीं बदली। वर्तमान में पंचायत की कमान महिला सरपंच के हाथ में जरूर है, लेकिन असली संचालन “सरपंच पति” कर रहे हैं, जो खुद वार्ड नंबर 13 से पंच हैं। पंचायत के फैसलों से लेकर विकास कार्यों तक सब कुछ एक ही परिवार के प्रभाव में चल रहा है।
“हर घर जल” योजना देवदरा में बनी मजाक
केंद्र और राज्य सरकारें गांव-गांव तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। “हर घर जल” योजना के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन देवदरा पंचायत में यह योजना कागजों तक सीमित नजर आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के रमपुरा और नर्मदा कॉलोनी क्षेत्रों में ही पानी की आपूर्ति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि चूना भट्टा, राजीव कॉलोनी, बर्रा टोला और आसपास की बस्तियों के लोग आज भी साफ पानी के लिए भटक रहे हैं।
नर्मदा कॉलोनी में भी नियमित सप्लाई नहीं हो रही। कई बार हफ्तों तक पानी नहीं आता, जबकि रमपुरा क्षेत्र में लगातार सप्लाई जारी रहती है। इससे ग्रामीणों में भेदभाव की भावना गहराती जा रही है। जिन इलाकों में नल-जल योजना नहीं पहुंची, वहां लोग सार्वजनिक हैंडपंपों या निजी बोरिंग पर निर्भर हैं। कई बोरिंग का पानी दूषित बताया जा रहा है, लेकिन मजबूरी में लोग वही पानी पी रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के कारण बच्चों और बुजुर्गों में बीमारी का खतरा लगातार बढ़ रहा है। संक्रमण की शिकायतें आम हो गई हैं। इसके बावजूद पंचायत स्तर पर कोई स्वास्थ्य या जल परीक्षण अभियान नहीं चलाया गया।
पानी के लिए गरीबों पर कर्ज का बोझ
पंचायत की लापरवाही का सबसे बड़ा असर गरीब और मजदूर परिवारों पर पड़ा है। जिन घरों तक नल-जल योजना नहीं पहुंची, वहां लोगों को मजबूरी में निजी बोरिंग करानी पड़ रही है। कई परिवारों ने स्वयं सहायता समूह और बैंकों से कर्ज लेकर पानी की व्यवस्था की है।
ग्रामीणों का कहना है कि पांच पंचवर्षीय से लगातार पंचायत में एक ही परिवार का कब्जा होने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाईं। कई बार शिकायतें की गईं, आवेदन दिए गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। उपेक्षित मोहल्लों को जानबूझकर विकास से दूर रखा जा रहा है।
विकास सिर्फ “अपने मोहल्ले” तक सीमित
देवदरा पंचायत में सबसे गंभीर आरोप पक्षपातपूर्ण विकास को लेकर लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच परिवार का निवास रमपुरा क्षेत्र में होने के कारण सड़क, पानी, सीसी रोड और अन्य निर्माण कार्य मुख्य रूप से उसी इलाके में कराए गए हैं। दूसरी ओर चूना भट्टा, राजीव कॉलोनी और बर्रा टोला जैसे इलाकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
इन बस्तियों की सड़कें जर्जर हालत में हैं। जगह-जगह गहरे गड्ढे हो चुके हैं और कई रास्ते पूरी तरह उखड़ गए हैं। बरसात के दौरान हालात और भयावह हो जाते हैं। कीचड़ और जलभराव के कारण लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सीवर लाइन निर्माण में भारी अनियमितता के आरोप
ग्रामीणों ने सीवर लाइन निर्माण कार्य में भी भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि पाइप लाइन डालने के लिए सड़कों को खोद दिया गया, लेकिन बाद में मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह धंस चुकी हैं और बड़े-बड़े गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं।
दोपहिया वाहन चालक रोज दुर्घटना का खतरा उठाकर निकल रहे हैं। स्कूली बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों और पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया।
नाली व्यवस्था ध्वस्त, गंदगी से बढ़ा संक्रमण का खतरा
देवदरा पंचायत के कई मोहल्लों में नाली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। कहीं नालियां अधूरी पड़ी हैं तो कहीं जाम होकर बदबू फैला रही हैं। गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
करोड़ा नाला के पास रहने वाले परिवारों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। बरसात के दौरान नालियों का गंदा पानी घरों के अंदर तक पहुंच जाता है। लोगों का कहना है कि कई बार पंचायत को सूचना दी गई, लेकिन सफाई और मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है।
शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला मुख्यालय से लगी पंचायत में इतनी बदहाली होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आखिर चुप क्यों हैं ग्रामीणों का कहना है कि जनपद पंचायत, पीएचई विभाग और जिला प्रशासन तक कई बार शिकायतें पहुंचाई गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, इसी कारण शिकायतों को दबा दिया जाता है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अब गांव के लोग पंचायत के विकास कार्यों, नल-जल योजना, सड़क निर्माण, सीवर लाइन और सरकारी राशि के उपयोग की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
जनता का सवाल — क्या यही है गांव का विकास?
एक ओर सरकार गांवों के विकास और “हर घर जल” जैसे अभियानों का प्रचार कर रही है, दूसरी ओर देवदरा पंचायत की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है। यहां लोग आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, टूटी सड़कों पर जान जोखिम में डालकर चल रहे हैं और गंदगी के बीच जीवन बिताने को विवश हैं।
पंचायत में वर्षों से जमी पारिवारिक सत्ता पर अब खुलकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक विकास सिर्फ “अपने लोगों” तक सीमित रहेगा? कब तक गरीब परिवार पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहेंगेऔर कब तक प्रशासन पंचायत की मनमानी पर आंखें मूंदे बैठा रहेगा?
देवदरा पंचायत की यह तस्वीर केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि उन सरकारी दावों की हकीकत भी उजागर करती है जिनमें गांवों के समग्र विकास की चमकदार तस्वीर पेश की जाती
