ड्राइवर बना ‘दलाल’? कृषि विभाग में रिश्वतखोरी का ऑडियो बम—अब जवाब कौन देगा?

Revanchal
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अशवनी झारियाप्रभारी उपसंचालक कृषि मण्डला

दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला |
जिले में ऐसे भी किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में भ्रष्टाचार ग़बन जैसे अनेकों मामंले जनता के सामने आना ये कोई नई बात नही है पर पहले भ्रष्टाचार ग़बन किसानो के बीज खाद में लूट जैसे अनेको मामंले प्रकाश में आते थे पर मैनेजमेंट में सब दब जाते थे पर जैसे ही मंडला जिले प्रभारी उपसंचालकअश्वनी झरिया ने प्रभार आपने हाथों में लिए वैसे ही डिंडोरी जिले जैसे ही इस जिले में लूट खसोट की योजनाएं संचालित शुरू हो चुकी है

और इन पर तो डिंडोरी जिले में पदस्थापना के दौरान किये गए भ्रष्टाचार ग़बन में जबलपुर की आर्थिक अपराध अन्वेषण व्यरो ने मामला दर्ज किया वावजूद इसके इनकी कार्यप्रणाली में कोई सुधार नही हुआ बल्कि सूत्र बतलाते है कि मामला दर्ज के बाद से कृषि विभाग में भ्रष्टाचार ग़बन जैसे मामंले और तेजी से शुरू हो चुके यहाँ तक कि अब सरकारी वाहन चालक ड्राइवर वसूली के लिए दुकान दुकान पहुँचाया जा रहा है,
सोशल मीडिया एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है जहाँ पर कृषि विभाग के पदस्थ और उप संचालक के ड्राइवर का ऑडियो वायरल हो रहा है जहाँ वह स्पष्ट दुकानदारो से पैसे लेने और ऑफिस में साहब से बैठ कर बात करवाने की बात ऑडियो में की जा रही हैं,


मंडला जिले का कृषि विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। इस बार मामला और भी संवेदनशील है, क्योंकि आरोप सीधे विभाग के प्रभारी उप संचालक अशवनी झारिया के नाम से जुड़ रहे हैं—वह भी उनके ड्राइवर के जरिए।


सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक कथित ऑडियो ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। ऑडियो में ड्राइवर मोंटी उर्फ मोहन ठाकुर कथित रूप से खाद-बीज व्यापारियों से “कार्रवाई से बचाने” के नाम पर पैसों की मांग करता सुनाई दे रहा है।
क्या है वायरल ऑडियो में?
ऑडियो में कथित तौर पर यह बातचीत सामने आई है—
“साहब” के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की जाती है
व्यापारी द्वारा 30 हजार बताने पर ड्राइवर कहता है—“32 ले आ… 35 ले आ, मैं साहब को मना लूंगा”
बातचीत में यह भी संकेत मिलता है कि “रात में दुकान पर साहब का आना” पहले से तय था
यह सिर्फ एक बातचीत नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल है—क्या विभागीय कार्रवाई अब “डील” के आधार पर तय हो रही है?
पुराने आरोप, और चल रही जाँच, अब नया सबूत?

वही सूत्र बताते हैं कि मंडला जिले में खाद-बीज व्यापारियों पर लंबे समय से दबाव बनाकर कथित वसूली की शिकायतें आती रही हैं।
लेकिन इस बार मामला सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं—ऑडियो सामने आने से पूरे नेटवर्क पर शक गहराया है।
सबसे बड़ा सवाल
क्या एक ड्राइवर इतनी बड़ी “डील” खुद कर सकता है?
क्या बिना अधिकारियों की जानकारी के यह सब संभव है?
या फिर ड्राइवर सिर्फ “मोहरे” की भूमिका निभा रहा है?
विभाग चुप, प्रशासन मौन
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद भी—
कृषि विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं
न ही जांच के आदेश की कोई पुष्टि
यह चुप्पी खुद कई सवाल खड़े कर रही है।
व्यापारियों और जनता की मांग
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का साफ कहना है— इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो
ऑडियो की फोरेंसिक जांच कराई जाए
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो
किसानों और दुकान संचलको की सीधी मांग
अगर “हर खेत को बीज और खाद” देने वाला विभाग ही “लेन-देन” में उलझ जाए, तो किसान किस पर भरोसा करेगा?
जिला प्रशासन और कलेक्टर को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
यह सिर्फ एक ऑडियो नहीं—यह पूरे सिस्टम की साख पर सवाल है।
अब देखना होगा—
कार्रवाई होगी… या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?

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