आखिर किसके संरक्षण में चल रहा फर्जीवाड़ा, कौन है जिम्मेदार
ओहनी और खिरखिरी पंचायत में तालाब घाट निर्माण की खुली पोल
बारिश से पहले ही दरकने लगी संरचनाएं
दैनिक रेवांचल टाईम्स – नैनपुर/मंडला। जनपद पंचायत नैनपुर इन दिनों गंभीर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली बंदरबांट किए जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले पर पर्दा डालते नजर आ रहे हैं। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर पंचायतों में चल रहे इस कथित भ्रष्टाचार को संरक्षण कौन दे रहा है?
सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत ओहनी एवं खिरखिरी में तालाब घाट निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये के कार्यों में गुणवत्ता को ताक पर रखकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। हालात यह हैं कि जिन घाटों को वर्षों तक टिकाऊ होना चाहिए था, वे पहली बारिश आने से पहले ही दरकने लगे हैं। जगह-जगह बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
पहले भुगतान, बाद में निर्माण — क्या यही है पंचायतों का नया मॉडल?
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत ओहनी में घाट निर्माण का कार्य कागजों में पहले पूरा दिखा दिया गया और लाखों रुपये की राशि निकाल ली गई। शिकायतें सामने आने के बाद आनन-फानन में निर्माण कराया गया, लेकिन निर्माण ऐसा कि कुछ ही दिनों में उसकी पोल खुल गई।
आरोप है कि सचिव, उपयंत्री, रोजगार सहायक और ठेकेदार की मिलीभगत से लगभग 9 लाख रुपये की अग्रिम राशि का आहरण कर लिया गया। इतना ही नहीं, निर्माण में आवश्यक लोहे का उपयोग तक नहीं किया गया। केवल दिखावे के लिए कुछ सरियों को ऊपर से गाड़ दिया गया, जबकि संरचना के भीतर तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया।
एक बारिश भी नहीं झेल पाएगा घाट, ग्रामीणों का दावा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि घाट निर्माण में न तो मजबूत बेस बनाया गया और न ही गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग किया गया। वर्तमान स्थिति को देखकर गांव के लोगों का कहना है कि यह घाट एक बारिश भी नहीं झेल पाएगा और पूरी संरचना क्षतिग्रस्त हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह सीधे-सीधे सरकारी धन की बर्बादी का मामला होगा।
शिकायतें हुईं, लेकिन कार्रवाई कहां है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जनपद पंचायत सदस्य द्वारा लिखित शिकायत की जा चुकी है, तब भी आज तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शिकायत के बाद जांच का दावा तो किया गया, लेकिन जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई और न ही किसी अधिकारी-कर्मचारी पर जवाबदेही तय की गई।
इससे यह आशंका और गहरी हो रही है कि कहीं मामले को दबाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। यदि शिकायत सही नहीं थी तो प्रशासन को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए, और यदि शिकायत सही है तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
जनपद पंचायत नैनपुर की भूमिका भी सवालों के घेरे में
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद जनपद पंचायत नैनपुर के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या अधिकारियों को इन अनियमितताओं की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानकारी में होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही? क्षेत्र में चर्चा है कि बिना अधिकारियों की जानकारी के इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितताएं संभव नहीं हैं।
जनता पूछ रही है कि आखिर जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी, पीसीओ और सीईओ इस मामले में क्या कर रहे हैं? शिकायतों पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है?
जिला प्रशासन और पंचायत विभाग से जवाब मांगेगी जनता
यदि पंचायतों में बिना निर्माण के भुगतान, घटिया निर्माण, गुणवत्ता में समझौता और शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होना सच है, तो यह केवल एक पंचायत का मामला नहीं बल्कि पूरे पंचायत तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
जिला प्रशासन, जिला पंचायत मंडला और पंचायत विभाग को अब स्पष्ट करना चाहिए कि—
बिना निर्माण राशि आहरण के आरोपों की जांच कहां तक पहुंची?
घाट निर्माण में गुणवत्ता की तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई गई?
शिकायत के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या सरकारी धन के दुरुपयोग की भरपाई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों से की जाएगी?
जनपद सदस्य ने उठाए सवाल
क्षेत्रीय जनपद पंचायत सदस्य साधना जागेश्वर ठाकुर द्वारा भी इस मामले की शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जांच और कार्रवाई शून्य है तथा मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
अब जनता के मन में एक ही सवाल
क्या ग्राम पंचायत ओहनी और खिरखिरी में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?
सरकारी धन से हुए कार्य यदि पहली बारिश से पहले ही टूटने लगें और शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न हो, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं बल्कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है। अब जिला प्रशासन और पंचायत विभाग को जवाब देना ही होगा।
