शिकायत बंद कराने का दबाव? निष्पक्ष जांच की मांग पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Revanchal
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सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को पुलिस रोब दिखाकर करा रही बंद

दैनिक रेवांचल टाईम्स – धूमा/सिवनी। मारपीट, जान से मारने की धमकी और गाली-गलौज की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से परेशान शिकायतकर्ता ने पहले धूमा थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर मामले की शिकायत सिवनी कलेक्टर की जनसुनवाई, पुलिस अधीक्षक कार्यालय तथा सीएम हेल्पलाइन में भी की गई। अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायतों का निराकरण करने के बजाय उन्हें वापस लेने और बंद कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।


शिकायतकर्ता के अनुसार, सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत को बंद कराने के लिए पहले पुलिस द्वारा कथित रूप से भ्रामक फॉलोअप दर्ज किया गया। इसके बाद आश्वासन देकर और शिकायत की वास्तविक स्थिति बताए बिना ओटीपी प्राप्त कर शिकायत बंद करा दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया था, लेकिन शिकायत बंद होने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।


मामले में नया मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुनः शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि इस शिकायत को भी बंद कराने के लिए धूमा थाने में पदस्थ एक एएसआई द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें फोन कर शिकायत वापस लेने और सीएम हेल्पलाइन की शिकायत बंद कराने के लिए कहा गया।


शिकायतकर्ता ने बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि एएसआई ने कहा, “अभी हमारी शिकायत बंद कराओ…”। इस पर शिकायतकर्ता ने जवाब दिया कि “सर, शिकायत अभी बंद नहीं होगी।” आरोप है कि इसके बाद एएसआई ने शिकायतकर्ता को समझाने और दबाव बनाने का प्रयास करते हुए कहा, “देखो फिर वही बात करने लगे यार तुम… हमारी बात मान लो, पुलिस से गलत मत करो।हम तुम से कह रहे हैं हमारी बात मानलो..!”
वहीं शिकायतकर्ताओं के साथ-साथ मामले के गवाहों को भी पुलिस शिकायत वापस कराने हड़का रही है। पुलिस का एक गवाह से कहना है कि शिकायत वापस कराओ तुम्हीं लोग शिकायतकर्ता को भड़का रहे हो शिकायत वापस कराओ नहीं तो 151 या किसी भी मामले में रगड़ देंगे।


ऐसे आरोपों के बाद क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।कि धूमा पुलिस एक दो नहीं बल्कि हर मामले पर पुलिस की कार्यप्रणाली सही नहीं है। वहीं शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के मामलों में पुलिस नरम रुख अपनाती है, जबकि शिकायत करने वाले लोगों पर दबाव बनाकर मामलों को समाप्त कराने का प्रयास किया जाता है। पीड़ितों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही धूमा पुलिस के लापरवाह अधिकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती है तो वे मामले को उच्च अधिकारियों, राज्य मानवाधिकार आयोग तथा अन्य सक्षम मंचों तक ले जाएंगे।

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