गुरारखेड़ा में नर्मदा की धारा तक पहुंचने हजारों घन मीटर मुरम डालकर तैयार किया गया रास्ता
मौके पर मिले रेत के विशाल भंडार
खनिज विभाग, वन विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल खनिज विभाग ने बांधी गंधारी की तरह आँखों मे पट्टी
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। पवित्र नर्मदा नदी के संरक्षण और पर्यावरण बचाने के सरकारी दावों के बीच मंडला जिले से सामने आई तस्वीरें बेहद चौंकाने वाली हैं। मंडला जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुरारखेड़ा में नर्मदा नदी के बीचों-बीच मुरम डालकर सड़क बनाए जाने का मामला सामने आया है। दैनिक रेवांचल टाइम्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, जहां नदी क्षेत्र के भीतर तक भारी वाहनों के आवागमन के स्पष्ट प्रमाण दिखाई दिए। घटनास्थल पर रेत के बड़े-बड़े ढेर भी मौजूद मिले।
वही स्थानीय लोगों का कहना है कि रेत के उत्खनन और परिवहन को आसान बनाने के उद्देश्य से नदी क्षेत्र में यह अस्थायी मार्ग तैयार किया गया। प्रत्यक्ष निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ किए जाने के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के बावजूद आखिर नदी के भीतर सड़क निर्माण कैसे हो गया?
सबसे हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर हुई गतिविधियों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। खनिज विभाग, वन विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका अब सवालों के घेरे में है। आखिर नदी के भीतर मुरम डालने, भारी वाहनों के संचालन और रेत के भंडारण जैसी गतिविधियां क्या संबंधित अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव हैं?
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि रेत कारोबार में प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। यदि ऐसी चर्चाओं में सच्चाई है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जनता यह जानना चाहती है कि क्या कानून केवल आम लोगों के लिए है या फिर रसूखदारों के लिए अलग व्यवस्था लागू होती है।
नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। मंचों से मां नर्मदा के संरक्षण की बातें करने वाले जिम्मेदार लोगों को अब यह जवाब देना होगा कि आखिर उनकी आंखों के सामने नर्मदा के अस्तित्व से खिलवाड़ कैसे होता रहा।
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल :
क्या नर्मदा नदी के भीतर सड़क निर्माण की अनुमति किसी विभाग ने दी थी?
यदि नहीं, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या एनजीटी के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया?
रेत के विशाल भंडारण और परिवहन की जानकारी प्रशासन को थी या नहीं?
क्या इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
मंडला की जनता अब जवाब चाहती है। यदि समय रहते अवैध गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो नर्मदा के प्राकृतिक स्वरूप को होने वाली क्षति की भरपाई संभव नहीं होगी। आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन तत्काल जांच दल गठित कर तथ्य सार्वजनिक करे और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों एवं अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
“गुरारखेड़ा क्षेत्र में नर्मदा नदी के भीतर मुरम डालकर बनाया गया मार्ग और मौके पर मौजूद रेत के भंडार।”
“दैनिक रेवांचल टाइम्स की टीम ने किया स्थल निरीक्षण”
रेवांचल टाइम्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर नदी क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नदी के भीतर तक बने मार्ग, भारी वाहनों के उपयोग के संकेत तथा रेत के भंडारण की स्थिति देखी गई। संबंधित विभागों से इस संबंध में जवाब मांगा जाना आवश्यक है, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।
