रेवांचल टाइम्स निवास मंडला। जिले के निवास तहसील अंतर्गत ग्राम हाथीतारा रैयत में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गांव का मुख्य सरकारी बोर खराब होने के कारण सैकड़ों ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग और प्रशासन अब तक समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव का सरकारी बोर पिछले कई दिनों से बंद पड़ा हुआ है। बोर की सफाई और मरम्मत की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। बढ़ती गर्मी और लगातार गिरते जलस्तर ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। गांव के आसपास के कई जलस्रोत सूख चुके हैं, जिससे लोगों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया है।
गांव की महिलाओं का कहना है कि सुबह से लेकर देर शाम तक उनका अधिकांश समय पानी की व्यवस्था करने में ही निकल जाता है। घर के कामकाज, बच्चों की देखभाल और अन्य जिम्मेदारियों के बीच उन्हें दूर-दूर तक पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कई परिवारों को पीने के पानी के लिए दूसरे गांवों या निजी स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और अधिक परेशानी पैदा कर रही है।
पानी की कमी का असर केवल ग्रामीणों तक सीमित नहीं है। गांव में पशुधन भी पानी के अभाव से जूझ रहा है। मवेशियों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। वहीं पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी जल संकट गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार द्वारा संचालित जलापूर्ति योजनाओं और पेयजल व्यवस्था के दावों के बावजूद ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है। जब गांव का एकमात्र प्रमुख सरकारी बोर खराब हुआ तो उसके रखरखाव और वैकल्पिक व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग की उदासीनता के कारण समस्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
उनका कहना है कि खराब पड़े बोर की तत्काल सफाई और मरम्मत कराई जाए। यदि तकनीकी कारणों से बोर चालू नहीं हो सकता तो गांव में नया बोर खनन कराया जाए और तब तक टैंकरों के माध्यम से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।
हाथीतारा रैयत का जल संकट अब केवल एक गांव की समस्या नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करने वाला मामला बन गया है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर राहत पहुंचाएगा, या फिर ग्रामीण यूं ही भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करते रहेंगे। फिलहाल गांव के लोगों की निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हुई हैं और वे जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
