नैनपुर में राजस्व विभाग और भू माफिया के गठबंधन से चल रहा बड़ा गोलमाल

Revanchal
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नैनपुर के कनौजिया टोला में सरकारी ज़मीन पर माफिया का ‘अवैध साम्राज्य’

राजस्व विभाग के आदेशों का मखौल, खसरा नंबर 197/2 पर अवैध निर्माण जारी, फाइलों में दफन हुआ ‘बेदखली का फरमान’

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले के विकास खण्ड नैनपुर की धरती पर एक ऐसा ‘खेल’ चल रहा है, जिसकी स्क्रिप्ट किसी फिल्मी घोटाले से कम नहीं है। कनौजिया टोला स्थित खसरा नंबर 197/2, जो सरकारी रिकॉर्ड में एक ‘सार्वजनिक मद’ की बेशकीमती भूमि के रूप में दर्ज है, आज भू-माफियाओं की हवस का शिकार हो चुकी है। जिस भूमि पर शहर के विकास के लिए अस्पताल, स्कूल या कोई अन्य जनकल्याणकारी प्रोजेक्ट होना चाहिए था, वहां आज माफियाओं ने अपनी ‘निजी जागीर’ बना ली है। धड़ल्ले से हो रही प्लॉटिंग और ईंट-पत्थर का अवैध निर्माण यह चीख-चीख कर कह रहा है कि नैनपुर में कानून का शासन नहीं, बल्कि ‘माफिया राज’ का बोलबाला है।

प्रशासन की नाक के नीचे पनपता ‘समानांतर सिस्टम’

वही इस पूरे गोरखधंधे की सबसे हैरान करने वाली सच्चाई राजस्व विभाग की वह कार्यप्रणाली है, जो संदेह के दायरे में है। जहाँ दस्तावेजों के मुताबिक, राजस्व विभाग द्वारा इस भूमि के संबंध में ‘बेदखली के आदेश’ पारित किए जा चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये आदेश किसके लिए जारी हुए थे? अगर आदेश जारी हुए थे, तो भू-माफियाओं के मकान धरातल पर कैसे खड़े हो गए? स्थानीय जानकारों का आरोप है कि प्रशासन का यह आदेश सिर्फ एक ‘ढकोसला’ है, जिसे दफ्तर की फाइलों में सिर्फ इसलिए रखा गया है ताकि आरटीआई या उच्च अधिकारियों की जांच में यह दिखाया जा सके कि ‘हमने कार्यवाही की है’। हकीकत में, इन फाइलों को ‘दीमक’ लग चुकी है और उन पर कोई भी अधिकारी कदम रखने को तैयार नहीं है।

क्या माफिया की जेब में है प्रशासनिक मशीनरी?

विस्तृत पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। जब भी भू-माफियाओं के इस कारनामे पर सवाल उठाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया में कार्यवाही का जज्बा गायब और माफियाओं के प्रति ‘हमदर्दी’ साफ झलकती है। ऐसा लगता है कि नैनपुर के तंत्र में ‘माफिया’ और ‘प्रशासन’ के बीच कोई गुप्त अनुबंध है। सूत्रों की मानें तो इन भू-माफियाओं को न केवल सत्ता का वरदहस्त प्राप्त है, बल्कि इन्हें ‘स्पेशल प्रोटेक्शन’ के साथ खुला लाइसेंस भी मिला हुआ है। स्थानीय लोग दबी जुबान में पूछते हैं—”क्या साहब का घर भी उसी अवैध ज़मीन के हिस्से से बना है, जिसका किराया माफिया वसूल रहा है?” ऐसे में पुलिस और राजस्व की चुप्पी को महज ‘लापरवाही’ नहीं, बल्कि ‘मिलीभगत’ माना जाना ही तर्कसंगत है।

सबूतों के बाद भी ‘मौन व्रत’ और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा

वही हमने इस मामले में खसरा, नक्शे, रजिस्ट्री की प्रतियां और सरकारी जमीन के तमाम पुख्ता सबूत राजस्व विभाग को सौंपे हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि सबूतों के उस बड़े पहाड़ के सामने प्रशासन ने ‘मौन व्रत’ धारण कर लिया है। यदि अधिकारी चाहते, तो आज बुलडोजर कनौजिया टोला की उस अवैध ज़मीन को समतल कर रहा होता। लेकिन, इसके विपरीत वहां निर्माण और तेजी से चल रहे हैं। यह स्पष्ट है कि भू-माफियाओं को इस बात का इल्म है कि उन्हें रोकने वाला कोई नहीं, क्योंकि उन्होंने ‘सिस्टम’ का पेट्रोल भरवा दिया है।

जनता की हुंकार: अब नहीं तो कब?

नैनपुर के नागरिकों के लिए यह अब सिर्फ जमीन का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वाभिमान का प्रश्न बन चुका है। क्या सरकार और प्रशासन यह सुनिश्चित करने में असमर्थ है कि सरकारी भूमि पर कब्ज़ा न हो? आज कनौजिया टोला की यह सरकारी ज़मीन लुट रही है, कल शहर का कोई और सरकारी हिस्सा माफियाओं के पास होगा। अगर अब भी कार्यवाही नहीं हुई, तो जनता को सड़कों पर उतरने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचेगा। प्रशासन के पास अब भी समय है कि वह ‘अनोखी कानून की किताब’ को बंद करे और धरातल पर कड़े तेवर दिखाए, अन्यथा जनता के माध्यम से उठने वाली यह आवाज़ आने वाले दिनों में बड़े जन-आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी।
आखिरकार कब तक राजस्व में बैठे जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी कब तक शासकीय भूमि को भू माफियाओं के साथ गठबंधन कर बेचते या फिर निजी हाथों में सौपते रहेगे यह बड़ा सवाल हैं।

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