मध्यप्रदेश की तबादला नीति के तहत किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का तीन वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर पदस्थ रहना नियमों के विपरीत माना जाता है, और ऐसा नहीं है कि प्रति वर्ष तबादला नीति ना आती हो। लेकिन सिवनी जिले में स्थिति अलग है।अधिकारियों के भक्त कर्मचारियों के तबादले नहीं होते।
कई वर्षों से जमे अफसरों-कर्मचारियों पर उठे सवाल
दैनिक रेवांचल टाईम्स – सिवनी -एमपी में सरकारी विभागों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नियमों में समय-समय पर तबादलों का प्रावधान होने के बावजूद कई कर्मचारी वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं। इससे न केवल पारदर्शिता प्रभावित होती है, बल्कि सरकारी राजस्व और प्रशासनिक व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रहने वाले कर्मचारियों के स्थानीय स्तर पर मजबूत नेटवर्क बन जाते हैं, जिससे कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगते हैं।
सिवनी जिले में स्थिति अलग
मध्यप्रदेश की तबादला नीति के तहत किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का तीन वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर पदस्थ रहना नियमों के विपरीत माना जाता है, लेकिन सिवनी जिले में स्थिति अलग है। सिवनी जिले की सभी तहसील, ब्लॉक और जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत सभी विभागों में ऐसे कई अधिकारी कर्मचारी पदस्थ हैं जो 5 -10 नहीं बल्कि 20-25 वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। स्थानांतरण सत्र शुरू होते ही एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया है कि आखिर वर्षों से जमे अधिकारियों पर तबादला नीति का असर कब दिखाई देगा।
कौन दे रहा संरक्षण
हर वर्ष तबादला सत्र के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले होते हैं, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो हर बार सूची से बाहर रह जाते हैं। और यदि सूची में नाम शामिल हो भी गया तो सेंटिंग के जरिए निरस्त भी करा दिया जाता है।इससे अन्य कर्मचारियों के बीच भी असंतोष देखने को मिलता है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को संरक्षण कौन दे रहा है और किन आधारों पर उन्हें वर्षों तक एक ही स्थान पर बनाए रखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रदेशभर में समान नीति लागू है तो फिर सिवनी में उसका पालन क्यों नहीं हो रहा और क्या प्रभावशाली पदस्थापना के चलते नियमों की अनदेखी की जा रही है।
कई 25 सालों से हैं पदस्थ
स्थिति केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है। जिले के कई कार्यालयों में लिपिकीय अमला, पटवारी, राजस्व निरीक्षक, सचिव, एमपीडब्ल्यू, शिक्षा विभाग, जनजातीय ,वन विभाग, स्वास्थ विभाग, कृषि, उद्यानिकी, जिला पंचायत, महिला बाल विकास पीएचई, नगर पालिका, , हाउसिंग बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, पशु विभाग सहित कई विभागों में अधिकारी 10 से 25 वर्षों या उससे अधिक समय से पदस्थ हैं। जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को मध्यप्रदेश की तबादला नीति के तहत नियमानुसार कार्रवाई करने की जरूरत है।
