EOW जबलपुर से जारी दूसरी नोटिस से कृषि विभाग में मचा हड़कंप

Revanchal
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डिंडोरी के करोड़ों के बीज घोटाले में EOW की दबिश, विभाग में हड़कंप!

अधिकारियों ने EOW को सौंपी ‘अधूरी’ जानकारी,

समनापुर-अमरपुर की जांच रिपोर्ट दबाने का खेल शुरू

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – जबलपुर डिंडोरी/ जिले के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग डिंडोरी में वर्ष 2021-22 में हुए करोड़ों रुपये के चना और मसूर बीज वितरण घोटाले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) इकाई जबलपुर ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है।

दैनिक रेवांचल टाईम्स ‘द्वारा इस महाघोटाले पर लगातार समाचार प्रकाशित की जा रही खबरों का बड़ा असर देखने को मिला है। जहा जानकारी के मुताबिक़ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो जबलपुर कार्यालय से लगातार मिल रहे नोटिसों के बाद भी जब कृषि विभाग के आला अधिकारियों ने जानकारी दबाने की कोशिश की, तो EOW ने सख्त रुख अपनाते हुए दोबारा अंतिम नोटिस जारी कर 15 जून 2026 तक हर हाल में मूल दस्तावेज सौंपने का कड़ा अल्टीमेटम दिया था।


अशवनी झारिया प्रभारी उपसंचालक कृषि मण्डला

वही इस पूरे मामले में कृषि विभाग के भीतर से एक और बड़ी साजिश की बू आ रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, EOW के कड़े रुख के बाद विभाग के अधिकारी जबलपुर मुख्यालय दस्तावेज लेकर तो पहुंचे, लेकिन जांच एजेंसी की आंख में धूल झोंकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारी जानबूझकर जांच एजेंसी को गुमराह करने अधूरी जानकारी और चुनिंदा दस्तावेज ही सौंपे गए हैं।


क्या है पूरा मामला और EOW का शिकंजा?
शिकायतकर्ता रूपभान सिंह पाराशर की शिकायत पर EOW जबलपुर (अपराध क्रमांक 94/25) के तहत जिले के छह प्रमुख विकासखंडों—डिंडोरी, समनापुर, अमरपुर, करंजिया, बजाग और शहपुरा में ‘तरफा योजना’ (क्लस्टर प्रदर्शन) के तहत बांटे गए चना और मसूर बीज की जांच कर रही है।
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक (जबलपुर इकाई) के पत्र क्रमांक 1385/2026 के तहत उप संचालक (कृषि) डिंडोरी से चार प्रमुख बिंदुओं पर मूल और प्रमाणित दस्तावेज मांगे गए थे:

  1. चना एवं मसूर बीज खरीदी की मूल नस्ती (क्रय आदेश और भुगतान विवरण)।
  2. बीज का वास्तविक स्टॉक रजिस्टर (भौतिक सत्यापन हेतु)।
  3. एकतरफा योजना के तहत वितरण और भुगतान करने वाले अधिकारियों के मूल आदेश और सर्विस बुक।
  4. समनापुर और अमरपुर विकासखंड में एसडीओ (SDO) द्वारा की गई जांच की सत्यापित रिपोर्ट
    जांच रिपोर्ट दबाने का खेल: सूत्रों का बड़ा खुलासा
    EOW को जो फाइलें सौंपी गई हैं, उनमें कुछ चुनिंदा कर्मचारियों की सर्विस बुक और स्टॉक बुक तो शामिल हैं, लेकिन सबसे बड़ा खेल समनापुर और अमरपुर विकासखंड की जांच रिपोर्ट के साथ किया गया है। अधिकारियों ने यह महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट EOW को नहीं सौंपी है।

चौंकाने वाला तथ्य: इस मामले के जांचकर्ता अधिकारी ने खुद आवेदक (शिकायतकर्ता) को साफ तौर पर सूचित किया है कि उन्होंने समनापुर और अमरपुर विकासखंड की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर कार्यालय में जमा करा दी है। इसके बावजूद, विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस रिपोर्ट को जानबूझकर छुपाया जा रहा है और EOW तक नहीं पहुंचने दिया जा रहा है।

वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि विभाग में हुए करोड़ों का घोटाला उजागर होने का डर
वही सूत्रों की मानें तो अगर समनापुर और अमरपुर की वह मूल जांच रिपोर्ट EOW के हाथ लग जाती है, तो कृषि विभाग के कई बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय है। इसी डर से पूरी रिपोर्ट को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं। कागजों पर ही बीज बांटकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का यह खेल अब सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार और साक्ष्यों को छुपाने (Evidence Tampering) की श्रेणी में आ चुका है।
अब देखना यह होगा कि आधी-अधूरी जानकारी से गुमराह होने के बजाय EOW की टीम इन रसूखदार भ्रष्टाचारियों पर सीधे जब्ती (Seizure) और वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई कब तक शुरू करती है।
रेवांचल समाचार पत्र इस महाघोटाले और किसानो क साथ हुए अन्याय की जारी रहेगी मुहीम भ्रस्टों खुलीगी परत दर परत हर परत को दस्तावेजो और सूत्रो से प्राप्त जानकारी पर लगातार उजागर करता रहेगा।

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