लेमा गार्डन: जहां कानून की नहीं, चाकुओं की चलती है सरकार

Revanchal
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जबलपुर। शहर में अपराध के कई पते हैं, लेकिन गोहलपुर का लेमा गार्डन इन दिनों मानो अपराध की राजधानी बनने की ओर बढ़ रहा है। यहां शाम ढलते ही कानून का नहीं, बल्कि नशे, गुंडागर्दी और चाकुओं का राज शुरू हो जाता है। सवाल यह है कि आखिर यह इलाका अपराधियों का सुरक्षित आश्रय स्थल कैसे बन गया?
कुछ दिन पहले ही यहां से नशीले इंजेक्शनों की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। कार्रवाई भी हुई, फोटो भी खिंचे, बयान भी आए, लेकिन नतीजा क्या निकला? वही जो अक्सर निकलता है…खानापूर्ति। और जब कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाए, तो अपराधियों के हौसले जमीन पर नहीं, आसमान पर पहुंच जाते हैं।
रविवार की आधी रात गाजीमियां स्थित मुन्ना होटल के पास एक और वारदात ने यही कहानी दोहरा दी। महज एक सिगरेट और पांच सौ रुपये की रंगदारी के लिए 18 वर्षीय युवक को चाकू मार दिया गया। सोचिए, इंसानी जान की कीमत अब एक सिगरेट के पैकेट और पार्टी के खर्चे से भी कम रह गई है।
पीड़ित साहिल अंसारी, जो मुन्ना होटल के पास चाय की छोटी सी दुकान चलाता है, रात करीब साढ़े बारह बजे दुकान बंद कर बाहर खड़ा था। तभी चांदनी चौक निवासी हारून और साहिद वहां पहुंचे। पहले गाली-गलौज, फिर सिगरेट की मांग और उसके बाद पार्टी के नाम पर पांच सौ रुपये की अड़ीबाजी। जब साहिल ने असमर्थता जताई तो दोनों आरोपियों ने उसे पीटना शुरू कर दिया।
बताया जाता है कि मारपीट के दौरान हारून ने जेब से चाकू निकाला और साहिल की जांघ में घोंप दिया। युवक लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा। उसके चीखने की आवाज सुनकर लोग जुटने लगे तो दोनों आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए।
यह घटना सिर्फ एक युवक पर हमला नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो लेमा गार्डन जैसे इलाकों को अपराधियों के लिए सुरक्षित और आम नागरिकों के लिए असुरक्षित बना रही है। लगभग 300 झुग्गी-झोपड़ियों वाले इस क्षेत्र में लंबे समय से नशे, अवैध गतिविधियों और आपराधिक तत्वों की मौजूदगी की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
फिलहाल घायल साहिल अंसारी की शिकायत पर गोहलपुर पुलिस ने हारून और साहिद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी से बड़ा है। सवाल यह है कि क्या लेमा गार्डन को अपराधियों के अड्डे में बदलने वाली परिस्थितियों पर भी कभी कार्रवाई होगी, या फिर अगली रात किसी और साहिल की बारी होगी?
मुहम्मद अनवार बाबू

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