डिंडोरी जिले के समनापुर विकासखंड की ग्राम पंचायत थालापुरी के शिकारी टोला की मिसाल—सरकारी इंतजार छोड़ ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य की नींव खुद रखी।
दैनिक रेवांचल टाइम्स डिंडोरी
डिंडोरी। जिले के समनापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत थालापुरी के शिकारी टोला में सरकारी तंत्र की उदासीनता के बीच ग्रामीणों ने वह कर दिखाया, जो वर्षों से जिम्मेदार विभाग नहीं कर सके। स्कूल भवन की मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने सरकार के भरोसे बैठने के बजाय खुद पहल की। हर परिवार ने 500 रुपये का चंदा दिया और गांव के महिला-पुरुष व युवाओं ने श्रमदान कर नए स्कूल भवन का निर्माण शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से स्कूल भवन की मांग संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी जाती रही, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले। मजबूरी यह थी कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और उन्हें सुरक्षित एवं पर्याप्त भवन उपलब्ध नहीं था। आखिरकार गांव ने स्वयं निर्णय लिया कि अब अपने बच्चों का भविष्य किसी सरकारी फाइल का मोहताज नहीं रहेगा।
ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग के साथ श्रमदान की अनूठी मिसाल पेश करते हुए निर्माण कार्य शुरू किया। कोई पत्थर ढो रहा है, कोई मिट्टी भर रहा है तो कोई निर्माण कार्य में हाथ बंटा रहा है। पूरा गांव एक परिवार की तरह बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जुट गया है।
यह पहल एक ओर ग्रामीणों की एकजुटता और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, तो दूसरी ओर जिम्मेदार विभागों और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। जब ग्रामीण अपने सीमित संसाधनों से स्कूल बना सकते हैं, तो करोड़ों रुपये के बजट वाले विभाग अब तक उनकी मूलभूत जरूरत क्यों पूरी नहीं कर सके?
शिकारी टोला की यह कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है, जहां शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी ग्रामीणों को खुद फावड़ा उठाना पड़ रहा है। अब ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य में आवश्यक सहयोग देकर स्कूल भवन को शीघ्र पूर्ण कराया जाए, ताकि क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
