राजस्व को चूना, पर्यावरण को नुकसान कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट की चेतावनी
रेवांचल टाइम्स मोहगांव मंडला जिले में खनिज माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा बोड़ा सिल्ली स्थित स्टोन क्रेशर पर लगे आरोपों से लगाया जा सकता है। मोहगांव निवासी समाजसेवी आनंद गुप्ता ने अनुविभागीय अधिकारी घुघरी को शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि संबंधित क्रेशर संचालक लीज अनुबंध की शर्तों को ताक पर रखकर निर्धारित सीमा से कहीं अधिक गहराई तक उत्खनन कर रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है और बिना रॉयल्टी के गिट्टी का कारोबार कर शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
शिकायत ने एक बार फिर जिले में संचालित स्टोन क्रेशरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि खदान क्षेत्र में उत्खनन के लिए निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा और मनमाने तरीके से धरती का सीना चीरकर खनिज निकाला जा रहा है।यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की खुली लूट का मामला होगा।
धरती का सीना चीरने की खुली छूट
आरोपों के मुताबिक खदान में निर्धारित गहराई से कहीं अधिक खुदाई की जा रही है। खनन विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गहराई तक उत्खनन से भूजल स्तर प्रभावित होता है, भूमि धंसने का खतरा बढ़ता है और आसपास के पर्यावरणीय संतुलन पर असर पड़ता है। सवाल यह है कि यदि खनन नियमों का उल्लंघन हो रहा था तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां थी।
बाल श्रम कानूनों की उड़ रही धज्जियां
शिकायत में लगाया गया सबसे गंभीर आरोप नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने का है। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह बाल श्रम निषेध कानून का सीधा उल्लंघन है। एक ओर सरकार बाल श्रम मुक्त भारत की बात करती है, दूसरी ओर औद्योगिक इकाइयों में बच्चों से मजदूरी कराए जाने के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। आखिर बच्चों के हाथों में किताबों की जगह मजदूरी का बोझ किसके संरक्षण में दिया जा रहा है।
एनजीटी के नियम कागजों तक सीमित
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा खनन और क्रेशर संचालन को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। धूल नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्रदूषण नियंत्रण जैसे उपाय अनिवार्य हैं। लेकिन शिकायत के अनुसार बोड़ा सिल्ली स्थित क्रेशर में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। यदि ऐसा है तो पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागों की भूमिका भी जांच के दायरे में आना चाहिए।
बिना रॉयल्टी गिट्टी बिक्री का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि खनिज सामग्री का विक्रय बिना वैध रॉयल्टी दस्तावेजों के किया जा रहा है। यदि यह सही है तो यह सीधे-सीधे सरकारी खजाने पर डाका डालने जैसा मामला है। शासन को मिलने वाला राजस्व निजी लाभ के लिए हड़पा जा रहा है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बिना रॉयल्टी सामग्री का परिवहन और विक्रय किसके संरक्षण में हो रहा है?
शिकायतें बहुत, कार्रवाई शून्य
जिले में अवैध खनन और स्टोन क्रेशरों की मनमानी को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। लेकिन अधिकांश मामलों में जांच केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति और फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यही कारण है कि नियम तोड़ने वालों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
क्रेशर सील करने की मांग, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
समाजसेवी आनंद गुप्ता ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा संबंधित स्टोन क्रेशर को तत्काल सील करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और केवल औपचारिक जांच कर मामला दबाने की कोशिश की गई तो वे न्याय के लिए माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेकर सच्चाई सामने लाता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा। फिलहाल बोड़ा सिल्ली का यह स्टोन क्रेशर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही हैं तो यह केवल एक क्रेशर का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।
