करोड़ों की राशि का हिसाब गायब, जांच की उठी जोरदार मांग
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला।मध्य प्रदेश के मंडला जिले में शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले सरकारी स्कूलों को मिलने वाली राशि के उपयोग में लूटपाट मची हुई है जी शिक्षक का कभी आदर सम्मान हुआ करता था जो कभी पूजे जाते रहे है आज वह शिक्षा के मंदिर लो लूटने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं आज शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार ग़बन सरकारी धन का दुरूपयोग लुट मची हुई है यह गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पालक शिक्षक संघ (PTA) और स्कूलों के खातों में हर वर्ष पहुंचने वाले फंड के दुरुपयोग की आशंका ने अब जनचर्चा का रूप ले लिया है। हैरानी की बात यह है कि इस राशि का न तो कोई ठोस भौतिक सत्यापन किया जा रहा है और न ही ग्राम सभा के सामने इसका पारदर्शी लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले के कई प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों में मरम्मत के नाम पर लगातार फंड जारी होता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अधिकांश स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं—दीवारों में दरारें, टूटी छतें और मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है। ऐसे में यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर स्कूलों को मिलने वाली राशि खर्च कहां हो रही है?
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि पालक शिक्षक संघ के माध्यम से आने वाली राशि का उपयोग बिना किसी पारदर्शिता के किया जा रहा है। ग्राम सभाओं में इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की जाती, जबकि नियमों के तहत सार्वजनिक खर्च का ब्यौरा देना अनिवार्य है।
विशेष रूप से जनपद पंचायत नैनपुर क्षेत्र के स्कूलों को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जिले के सभी सरकारी स्कूलों—प्राथमिक से लेकर कॉलेज स्तर तक—को मिलने वाली राशि का स्कूलवार भौतिक सत्यापन कराया जाए और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं कराई गई, तो यह मामला बड़े वित्तीय घोटाले का रूप ले सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया।
मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले ने शिक़वा शिकायतें होती है पर जांच अंजाम तक नही पहुँचती है बस केवल जाँच के जिला प्रशासन के द्वारा मामंले को संज्ञान लिया जाता है फिर जांच होती है पर कैसी होती कौन दोषी होता है कब कैसे और कहा ये सब लापता रहता है
बस जाँच होती और जांच रिपोर्ट धूल खाती रहती है इसलिए दिन व दिन भ्रष्टाचार ग़बन सरकारी योजनाओं में लूट मची हुई है और आज बेखौफ तौर पर माफियाओं रसूखदारों का जिले में राज चल रहा है और जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन गूंगे बहरे की तरह कोने में पड़े सब देख रहे हैं जनता परेशान है अब इन्हें प्रशासनिक अमला से भरोसा ही उठता जा रहा है।
