कर्बला चौक पर सजे रहे आकर्षक ताजिये, उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम
यातायात और पुलिस प्रशासन की सूझबूझ से बनी रही शहर की रफ्तार
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
प्यास लगते ही पी लिया पानी, फिर मैं शर्मिंदा कर्बला से हुआ…”
इन्हीं रूहानी और भावुक कर देने वाले कलामों के बीच छिंदवाड़ा शहर में मोहर्रम का पर्व बेहद अकीदत, अदब और कौमी एकता के साथ मनाया गया। इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में पूरे शहर में मातमी माहौल रहा, जहाँ हिंदू-मुस्लिम दोनों ही समुदायों ने मिलकर भाईचारे की एक अनूठी मिसाल पेश की।
शहर के मुख्य रास्तों से होते हुए अलम और ताजियों का कारवां पारंपरिक कर्बला चौक पहुँचा। यहाँ बेहद खूबसूरत और आकर्षक ताजिये रखे गए थे, जिन्हें देखने के लिए देर रात तक जायरीनों और अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ता रहा। छिंदवाड़ा की इस पावन धरा पर हर साल की तरह इस बार भी मोहर्रम सिर्फ एक कौम का नहीं, बल्कि आपसी सद्भाव का प्रतीक बन कर उभरा, जहाँ हर आंख कर्बला के शहीदों की याद में नम नजर आई।
यातायात विभाग की सूझबूझ से थमी नहीं शहर की रफ्तार
चूँकि मुख्य कर्बला चौक यातायात थाने के बिल्कुल समीप स्थित है, इसलिए यह मार्ग सामान्य दिनों में भी बेहद व्यस्त और संवेदनशील माना जाता है। मोहर्रम के मौके पर यहाँ उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए यातायात विभाग द्वारा बेहद चाक-चौबंद और सराहनीय व्यवस्था की गई थी।
यातायात पुलिस ने रूट डायवर्जन और पार्किंग की ऐसी बेहतरीन प्लानिंग की कि इतने व्यस्त मार्ग पर भी कहीं जाम की स्थिति निर्मित नहीं हुई। आम राहगीरों और मोहर्रम के जुलूस दोनों को ही बिना किसी परेशानी के रास्ता मिला, जिसकी शहरवासियों ने जमकर सराहना की।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पुलिस व्यवस्था रही चौंकस
त्योहार को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए जिला एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। कर्बला चौक सहित शहर के हर संवेदनशील चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। आला अधिकारियों की सीधी निगरानी और पुलिस की चौंकस व्यवस्था के चलते पूरा पर्व पूरी शांति, सुरक्षा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
