बट पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्स – हिंदू धर्म में बट पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व होता है इस दिन बट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने का महत्व है सुहागिन महिलाएं बट वृक्ष की परिक्रमा करती है सूत बांधती है और मिलकर सावित्री सत्यवान की कथा सुनती हैं जिससे दांपत्य जीवन में आने वाली बाधाये दूर होती हैं साथ ही पति-पत्नी के बीच रिश्तो में मजबूती आती है जो सुहागिन महिला बट पूर्णिमा पर अखंड सौभाग्य के लिए बट वृक्ष की पूजा करती है उनकी मनोकामनाएं पूरी होती है


बट वृक्ष पूजा के लाभ
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि हिंदू धर्म में वट वृक्ष की पूजा के लिए विशेष विधान बताया गया है स्कंद पुराण के अनुसार अगर सुबह शाम और विशेष तिथियां पर बट वृक्ष की पूजा की जाए तो दांपत्य जीवन में सुख और शांति आती है इसके अलावा जो व्यक्ति बट वृक्ष का रोपण करता है उसको अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है इस वर्ष बट पूर्णिमा पर दो शुभ योगो का निर्माण हुआ है बट पूर्णिमा पर पहला सुभ योग दोपहर 2:36 रहेगा वही दूसरा शुभ योग ब्रह्म है जो पहले योग के खत्म होने के बाद शुरू हो जाएगा शुभ योग में पूजा करना बहुत ही लाभकारी होता है हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 29 जून को 3:06 पर शुरू हो जाएगी जो अगले दिन 30 जून को 5:26 पर खत्म होगी उदीया तिथि के अनुसार पूर्णिमा 30 जून को मनाई जाएगी बट पूर्णिमा पर पूजा और स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:06 से लेकर 5:26 तक रहेगा वही इस दिन अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना शुभ माना गया है


पंडित संदीप ज्योतिषी अमरकंटक ने बताया की यह व्रत प्रेम त्याग और निष्ठा आज आजीवन वैवाहिक संबंध का प्रतीक है इस दिन महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखकर पति की दीर्घायु उत्तम स्वास्थ्य और सुख समृद्धि की प्रार्थना करती है यह व्रत माता सावित्री की अद्भुत पवित्रता बुद्धिमता और अटूट विश्वास से प्रेरित है जिन्होंने अपने दृढ़ संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान की प्राण वापस प्राप्त किए थे यह पर्व हमें सिखाता है की सच्ची धैर्य श्रद्धा और समर्पण के सामने मृत्यु जैसी कठिन परिस्थिति भी पराजित हो सकती है


बट वृक्ष का धार्मिक महत्व
बरगद के पेड़ को सनातन धर्म में अमृत्व स्थिरता और दीर्घायु का प्रतीक माना गया है शास्त्रों के अनुसार इनकी जड़ों में ब्रह्मा तने में विष्णु और शाखों में शिवजी विराजमान रहते हैं इसी वजह से इस पेड़ की पूजा करने से त्रिदेव का आशीर्वाद मिलता है बरगद का विशाल और दीर्घायु स्वरूप अखंड सौभाग्य सुखी दांपत्य जीवन और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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