बीजाडांडी में अवैध शराब, जुआ-सट्टे का काला साम्राज्य आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा कारोबार

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स बीजाडांडी मंडला जिले के बीजाडांडी ब्लॉक में अवैध शराब, जुआ और सट्टे का कारोबार अब कानून और प्रशासन को खुली चुनौती देता नजर आ रहा है। गांव-गांव तक फैले इस काले नेटवर्क के खिलाफ अब जनप्रतिनिधियों की आवाज भी मुखर होने लगी है।

वन स्थाई समिति एवं जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र क्रमांक 15 पुष्पा मरकाम ने थाना बीजाडांडी प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपकर क्षेत्र में चल रहे अवैध कारोबार पर तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में लगाए गए आरोपों ने पुलिस, आबकारी विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


आवेदन के अनुसार बीजाडांडी ब्लॉक के गांवों में खुलेआम अवैध शराब बेची जा रही है। शराब ठेकेदारों द्वारा गांव-गांव शराब पहुंचाई जा रही है, वहीं कई जगहों पर कच्ची हाथ भट्टी शराब बनाकर धड़ल्ले से बेची जा रही है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि शाम होते ही गांवों में शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है। शराब के नशे में गाली-गलौज, विवाद, मारपीट और घरेलू हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। गांवों का सामाजिक माहौल पूरी तरह बिगड़ चुका है और युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में बर्बाद हो रही है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर अवैध शराब और सट्टे का कारोबार बिना संरक्षण के कैसे चल सकता है गांवों में खुलेआम सट्टे की पर्चियां काटी जा रही हैं, जुआ फड़ संचालित हो रहे हैं, लेकिन पुलिस को कुछ दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस और आबकारी विभाग वास्तव में ईमानदारी से कार्रवाई करें तो 24 घंटे में यह पूरा नेटवर्क खत्म हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके इशारे पर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है सूत्रों से जानकारी अनुसार मानें तो शराब माफिया, सट्टा कारोबारियों और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है, जबकि अवैध कारोबार पहले से ज्यादा तेजी से फैलता जा रहा है। आरोप है कि जिम्मेदार विभाग सबकुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं।


जिला पंचायत सदस्य पुष्पा मरकाम ने अपने आवेदन में बीजाडांडी स्थित शराब दुकान को बंद कराने अथवा उसे रिहायशी क्षेत्र से दूर स्थानांतरित करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि शराब दुकान के कारण क्षेत्र में अपराध और असामाजिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। महिलाओं और बच्चों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। कई गांवों में परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से टूटने लगे हैं।


प्रशासनिक उदासीनता के कारण अपराधियों और शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। गांवों में बेरोकटोक शराब बिक रही है, लेकिन कार्रवाई केवल छोटे लोगों तक सीमित रह जाती है। बड़े कारोबारी और उनके संरक्षक हमेशा बच निकलते हैं।
अब पूरा मामला प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक बीजाडांडी क्षेत्र को अवैध शराब, जुआ और सट्टे के दलदल में धकेला जाता रहेगा। क्या जिम्मेदार विभाग माफियाओं के आगे नतमस्तक हो चुके हैं, या फिर कार्रवाई का डर केवल आम जनता के लिए ही बचा है फिलहाल क्षेत्र में एक ही चर्चा है—“बिना संरक्षण के इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव ही नहीं।

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