कबाड़ की आड़ में करोड़ों का काला खेल, आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध कारोबार

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स मंडला जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में कबाड़ के नाम पर चल रहे अवैध कारोबार ने अब कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि कबाड़ी बाजार बेखौफ होकर संचालित हो रहे हैं, जबकि जिले में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि आखिर चोरी हो रहे वाहन और लापता हो रही लोहे की सामग्री कहां खप रही है क्या कबाड़ की दुकानों की आड़ में कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है


सूत्रों से जानकारी अनुसार जिले के कई कबाड़ी ठिकानों पर प्रतिदिन भारी मात्रा में कबाड़ खरीदा और बेचा जा रहा है। ट्रक, पिकअप और अन्य वाहनों के माध्यम से कबाड़ जिले से बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन इसकी वैधता की जांच करने वाला कोई नजर नहीं आता। आरोप है कि कुछ कबाड़ी चोरी के वाहनों को खरीदकर उन्हें काट देते हैं और उनके कल-पुर्जों को अलग-अलग कर बाजार में खपा देते हैं। वाहन की पहचान मिटते ही उसके पार्ट्स सीमावर्ती जिलों और दूसरे राज्यों तक पहुंच जाते हैं, जिससे चोरी का वाहन हमेशा के लिए गायब हो जाता है।


जिले में दर्जनों वाहन चोरी के मामले ऐसे हैं जिनका आज तक कोई सुराग नहीं लग पाया। पीड़ित थानों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनके वाहन बरामद नहीं हो सके। ऐसे में जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर चोरी का माल जा कहां रहा है यदि कबाड़ बाजारों की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि कबाड़ के नाम पर केवल पुराना लोहा ही नहीं खरीदा जा रहा, बल्कि पुराने औजार, मशीनरी, निर्माण सामग्री और संदिग्ध स्रोतों से आए लोहे का भी खुलेआम कारोबार हो रहा है। कई स्थानों पर पुराने और जंग लगे लोहे को काटकर भवन निर्माण में उपयोग होने वाले रिंग और अन्य सामग्री तैयार की जा रही है। बिना किसी गुणवत्ता परीक्षण के यह सामग्री सस्ते दामों में बाजार में बेची जा रही है। मुनाफे के इस खेल में लोगों की जान तक दांव पर लगाई जा रही है।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में संचालित कई कबाड़ी दुकानों के पास न तो खरीद-बिक्री का व्यवस्थित रिकॉर्ड है और न ही माल के स्रोत की कोई स्पष्ट जानकारी। इसके बावजूद कारोबार बेरोकटोक जारी है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या संबंधित विभागों की नजर इस पूरे खेल पर नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं


कई कबाड़ी दुकानों पर पुराने तसले, फावड़े, छेनी, हथौड़ी, बसूला और खेती के उपकरण बेहद कम कीमतों पर उपलब्ध हैं। यह भी जांच का विषय है कि ये सामान आखिर कहां से आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उपकरणों और निर्माण सामग्री की चोरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिलता। ऐसे में शक की सुई कबाड़ बाजार की ओर घूमना स्वाभाविक है।
जानकारों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना चाहता है तो जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर सभी कबाड़ी दुकानों का सत्यापन कराया जाए। दुकानों में रखे माल, खरीद-बिक्री रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज और लाइसेंस की गहन जांच हो। साथ ही वाहन चोरी के मामलों को कबाड़ कारोबार से जोड़कर भी जांच की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में अवैध कबाड़ कारोबार की चर्चाएं वर्षों से चल रही हैं, तब अब तक कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई क्या जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने से बच रहे हैं या फिर इस पूरे खेल को किसी प्रभावशाली संरक्षण का कवच मिला हुआ हैफिलहाल मंडला में कबाड़ का यह काला बाजार कानून के लिए खुली चुनौती बन चुका है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो चोरी, अवैध खरीद-फरोख्त और संदिग्ध गतिविधियों का यह नेटवर्क और मजबूत होगा। जनता अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि उन चेहरों का भी खुलासा चाहती है जिनकी छत्रछाया में यह अवैध कारोबार दिन-रात फल-फूल रहा है।

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