मरीज की जान से खिलवाड़ का मामला, कलेक्टर ने दिखाई सख्ती; लापरवाही पर तत्काल निलंबन, विभागीय जांच शुरू।
दैनिक रेवांचल टाइम्स डिंडौरी। जिला चिकित्सालय डिंडौरी में मरीज के उपचार के दौरान सामने आई कथित गंभीर लापरवाही ने पूरे स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मरीज को सामान्य स्लाइन वॉटर के स्थान पर पैक्ड पेयजल की बोतल का उपयोग किए जाने के मामले में कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला चिकित्सालय में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर सुश्री भावना चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
कलेक्टर द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि संबंधित नर्सिंग ऑफिसर ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती, जिससे न केवल मरीज की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए बल्कि शासन एवं स्वास्थ्य विभाग की छवि भी धूमिल हुई। इस कृत्य को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 के अंतर्गत कदाचार की श्रेणी में माना गया है।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में सुश्री भावना चौहान का मुख्यालय कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डिंडौरी रहेगा तथा उन्हें बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
यह मामला केवल एक कर्मचारी की लापरवाही तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि अस्पताल में उपचार के दौरान स्थापित चिकित्सीय मानकों की अनदेखी हुई है, तो यह जानना भी जरूरी है कि ऐसी स्थिति बनने तक जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे और निगरानी व्यवस्था क्यों विफल रही।
अब पूरे जिले की नजर विभागीय जांच पर टिकी है। लोगों की अपेक्षा है कि जांच निष्पक्ष हो और यदि इस मामले में अन्य किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में मरीजों की जान से किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो सके।
