आदिवासी बच्चो का खून का प्यासा उपयंत्री, दो कालम तुड़वा मौत का खौफ बिल्डिंग को दी अनुमति

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आदिवासी बच्चो का खून का प्यासा उपयंत्री, दो कालम तुड़वा मौत का खौफ बिल्डिंग को दी अनुमति

जनजातीय उपयंत्री तिवारी द्वारा 2 कालम तोड़वा कर, कर दी जांच खत्म बाकी भवन की जांच करेगा कौन

रेवांचल टाईम्स -मंडला, आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला में भ्रस्टो का चारागाह बना हुआ है और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के साथ साथ जिला प्रशासन चैन की बंशी बजा रहा है इन्हें जिले में कौन विभाग में क्या चल रहा कौन परेशान है और कौन मालामाल हो रहे है इसे कोई लेना देना नही है इन्हें जिम्मेदार केवल अपनी डियुटी कर अपनी मौजूदगी दे रहे है को हम है आप लूट लो कोई कुछ नही करेगा क्योंकि शिकायत होगी तो हमारे पास ही होनी है और जाँच भी हमे करनी है, और जिले के विभाग निर्माण एजंसी और ठेकेदारों को भय मुक्त सरकारी धन की लूट मची और निर्माण कार्यों में हो रही लूट में सब का अपना अपना हिस्सा बना हुए है और वह समय समय मे पहुँच रहा है शायद इसलिए भी जिले के जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर नही देखना मुनाशिव नही समझते हैं।


वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में स्कूल और छात्रावास के नव निर्माण भवनों का कार्य तेजी से चल रहा है और इन भवन निर्माण कार्य की रेख देख जिले के पी डब्ल्यू डी पी आई यू की से हो रहा पर इन विभाग के इंजीनियरिंग और एस डी ओ उपयंत्रियों के द्वारा चल रहे भवन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता फ़ील्ड में न देख कार्यालय में बैठ ही देखी जाने की जानकारी मिल रही और ठेकेदारों को बेलगाम छोड़ दिया वह रेत की मिट्टी युक्त रेत और काली डस्ट का उपयोग कर मौत का भवनों का निर्माण कार्य जारी है। जहाँ कुछ दिनों पहले ही विकास खंड बीजाडांडी के अंतर्गत ग्राम विजयपुर में बालक छात्रवास का निर्माण 3.42 करोड़ की लागत से करवाया जा रहा है! नवनिर्माण भवन की कालम भरभरा के गिर गई निर्माण कार्य में ठेकेदार और विभाग की पोल खुल गई जहाँ यह दिखाई पड़ गया कि ठेकेदार और विभाग के द्वारा खुल्ल्म खुल्ला लापरवाही बरती गई है ! जिसे गांव वालो ने संज्ञान में लेकर कार्य बंद करवा दिया गया था

और उसकी शिकायत विभाग और अन्य जगह की हुई थी लेकिन 4 -5 दिन कार्य बंद होने के बाद उपयंत्री द्वारा जांच तो की गई लेकिन जांच कैसी की इसका खुलासा ग्रामवासियों ने किया की उपयंंत्री द्वारा प्लंथ के ऊपर के 2 कालम नाम मात्र के लिए तुड़वा दिया गया जिससे गांव का माहौल को शांत किया जा सके ग्रामवासियों का कहना है की जहा प्लंथ में घटिया सामग्री का उपयोग हुआ था ! जहा से सुखी गिट्टी निकल रही थी जहां बिगर जाला बिछाए ही कालम खड़े कर दिए गए थे जहा बिना जुड़ाई के बीम डाल दी गई थी जहा सूखे ईंट लगा कर बीम डाली गई थी उसे उपयंत्री ने कुछ कहा ही नहीं ऊपर ऊपर तुड़वा कर काम चालू करवा दिया ये जांच थी या विभाग द्वारा नाटकीय कार्यक्रम कर ठेकेदार को अपनी गोद मे बिठाल कर उसे पुनः कार्य करने छोड़ दिया है।

Sub-engineer thirsty for the blood of tribal children, dies after breaking two columns
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सरकार के खजाना का वहीं चोर वहीं सिपाही, आदिवासी बच्चे मरे तो मरे ऐसी सोच से दिया अंजाम

ग्रामवासियों ने बताया कि जब जांच चल रही थी तो उपयंत्री और ठेकेदार साथ में आए और जांच चालू कर दी और किसी को जानकारी भी देना उचित नहीं समझा जब उपयंत्री को ही जांच करना था तो जांच का विषय का मतलब क्या था वही उपयंत्री मूल्यांकन करे और वही जांच, वाह विभाग की गोल मोल प्रक्रिया का मतलब सीधा था खुद और ठेकदार से मिलीभगत अनुसार सरकार के खजाने को लूट सको तो लूट कि निति कि तर्ज पर जांच हो रही थी ग्रामजन जन का कहना था विभाग आदिवासी बच्चो का मसीहा बनना चाहता है तो जांच के लिए विभागीय उपयंत्री को क्यों भेजा मंडला में बैठ कर जांच कर लेते ग्रामवासियों को जानकारी लगी की जांच करने कोई आया है तब ग्रामवासी वहां पहुंचे और देखा की उपयंत्री कालम तोड़ने को बोल रहा है जब उपयंत्री को नीचे की स्थिति गांव वाले द्वारा बताई गई तो उपायंत्री बोला में सब देख रहा हु सब सुधरवा दूंगा आप लोग यहां भीड़ मत लगाओ यहां से भाग जाओ सब टूटेगा और वही दूसरे दिन 2 कालम टूटे और ऊपर से कार्य चालू कर दिया गया।

जनजाति कार्य विभाग ही है लुटेरा ,वहीं मूल्यांकनकर्ता वहीं है जाँचकर्ता

जनजाति कार्य विभाग में दूसरा संतोष शुक्ला की जगह उपयंत्री तिवारी को लाया है यह विभाग मंडला में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर गया है छात्रवास निर्माण में प्लंथ जहा बिना बिछाए जाल में खड़ी हो जाएं और मूल्यांकन कर्ता ही जांच करे तो क्या जांच का निष्कर्ष निकलेगा आप समझदार है वहीं चोर वहीं सिपाही है, पर विभाग और उच्च अधिकारी भी जानते है उसके बाद भी ध्यान न देना यह साबित करता है बोले तो कद्दू कटेगा तो सबमे बटेगा सिद्ध भी हुआ और उच्च अधिकारी भी खामोश है मतलब सीधा है उच्च अधिकारी तक इसका कमीशन जाता होगा और साथ में कुछ जनप्रतिनिधियों को भी तभी उपयंत्री को जांच दी गई है ऐसा न करे गरीब आदिवासियों के साथ बच्चे पढ़ने आयेंगे और जिस तरह से बिल्डिंग की प्लंथ हुई है उसे तो ग्रामवासियों ने प्लंथ गिरने का नजारा स्वयं देखा है जो भविष्य में कई बच्चो को काल के गाल में सामने तैयार हो रही है ! जब यह छात्रावास भवन कई आदिवासी बच्चो को मौत कि नींद सुला देगी तब शासन प्रशासन जागेगा फिर जांच होगी कलेक्टर के माध्यम से पैसा से अभिभावक का दिल जितने का काम होगा सब ग्राम जन चाहते है ऐसी नौबत न ही आए

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बिल्डिंग का हो गया भुगतान,सड़क में उतर आए ठेकेदार उपयंत्री बाँट रहे पैसा

वही सूत्र बताते है कि सेटिंग से बिल्डिंग का भुगतान हो गया है एक हवा के झोंके में प्लंथ जमींदोज हो गया अब उपयंत्री और ठेकेदार बोले तो चोर चोर चोर मोसेरे भाई अपनी करतूत को ढकने पैसे खरीद फरोख्त कर रहे है लूटने की भी होड़ मची है चर्चा का विषय बना हुआ है उपयंत्री और ठेकदार द्वारा जनप्रतिनिधियों और कुछ नेता पत्रकारों को हरे हरे करारे नोटों से जाँच एवं खबर न छापने के एवज में नोट कि बरसात कर रहे है ! नोट कि गड्डी ने शांति कि राह पर चलने को मजबूर कर दी ! क्यों की जांच निष्पछ जाँच हुई तो उपयंत्री का बर्खास्त होना तय है और मंडला जिला से ठेकेदार ब्लैकलिस्ट होना भी तय है। क्यों की सूत्रों से खबर है, मंडला में बैठे बैठे उपयंत्री ने मूल्यांकन करके ठेकदार को निर्माण से अधिक का भुगतान करवा दिया गया है जिसे उपयंत्री को डर है की जांच अगर बढ़ी तो प्लंथ तो तोड़ना पड़ेगा ही साथ मे में भी सस्पेंड हो जाऊंगा इसलिए ठेकदार द्वारा कुछ नेताओं से सरपंच के पास फोन करवा के कार्य चालू करने का और गांव में माहौल शांत करने का दबाव बनाया जा रहा है और सरपंच उपसरपंच को लालच भी दिया जा रहा है की कार्य चालू करवाए लेकिन ग्राम वासियों के माहोल के आगे दबाओ से काम नहीं चलने पर ठेकेदार द्वारा 2 कालम तोड़ कर कार्य चालू करवा दिया गया है लेकिन ग्रामवासियों और छेत्रवासियो का कहना है की अगर बिना प्लंथ तोड़े अगर कार्य होता है तो हम इसकी शिकायत ईओडब्लू और कोर्ट जाने को तैयार है जिससे हमारे आदिवासी के बच्चों को भविष्य में कोई खतरा न हो सके और प्लंथ तुड़वा कर नए सिरे से दूसरे ठेकेदार और दूसरे विभाग के उपयत्री से कार्य चालू करवाएंगे अगर निर्माण कार्य नही रुकता है कुछ दिन में तो आंदोलन होगा जिसके जिम्मेदार शासन प्रशासन होंगे। और आख़िर कार कब तक चैन की नींद सोते रहेंगे जिले के विधायक सांसद और जिला प्रशासन क्योंकि विभाग ठेकेदार से साठगांठ कर अपनी जेबें भरने में लगा है कल कोई घटना होती है जो जबाब किसको देना विभाग को या ठेकेदार को या फिर जिला प्रशासन और जिले के जनप्रतिनिधि जो चैन की नींद से आराम फरमा रहें हैं।

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