दैनिक रेवांचल टाइम्स, सिवनी।
सिवनी जिले की जनपद पंचायत सिवनी अंतर्गत ग्राम पंचायत कोहका (फुलारा) का मामला प्रशासनिक लापरवाही और संभावित वित्तीय गड़बड़ियों की गंभीर कहानी बयां कर रहा है।
यहां पदस्थ रहे पंचायत सचिव अरविंद सनोडिया पिछले एक वर्ष से अधिक समय से पंचायत से गायब बताए जा रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय बाद भी जनपद और जिला पंचायत प्रशासन उनसे अधूरे कार्यों और खर्च की गई राशि का पूरा हिसाब नहीं ले पाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, सचिव के लंबे समय से अनुपस्थित रहने की शिकायतें कई बार प्रशासन तक पहुंचाई गईं। इसके बाद प्रशासन ने औपचारिक कार्रवाई करते हुए उन्हें “नो वर्क नो पे” कर दिया और पंचायत का प्रभार अस्थायी रूप से फुलारा के सचिव को सौंप दिया।
लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि सचिव एक साल से अधिक समय से पंचायत से नदारद हैं, तो अब तक उनसे विधिवत चार्ज क्यों नहीं लिया गया? और पंचायत के खातों से निकाली गई विकास कार्यों की राशि का ऑडिट या सत्यापन क्यों नहीं कराया गया?
अधूरे पड़े विकास कार्य, उठ रहे गड़बड़ी के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ कार्यों की राशि पहले ही निकाल ली गई, लेकिन जमीन पर काम पूरा नहीं हुआ।
नए सचिव को जब पंचायत का प्रभार दिया गया तो उन्हें पुराने कार्यों का पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला। इससे पंचायत का कामकाज प्रभावित हो रहा है और कई योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, प्रशासन पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अब तक न तो पूर्व सचिव से पूरा चार्ज दिलवाया और न ही वित्तीय लेन-देन की गंभीर जांच कराई। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या किसी स्तर पर सचिव को संरक्षण मिल रहा है?
ग्रामीणों की मांग – जांच हो, एफआईआर दर्ज हो
ग्रामवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पूर्व सचिव से सभी लंबित कार्यों और निकाली गई राशि का पूरा हिसाब लिया जाए। साथ ही अधूरे विकास कार्यों को जल्द पूरा कराया जाए और यदि वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन एक साल से गायब सचिव से जवाबदेही तय करेगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
