दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला, बिछिया। वन अधिकारों के मामलों में प्रशासनिक उदासीनता और कथित तानाशाही रवैये के विरोध में आज बिछिया तहसील मुख्यालय में जन संघर्ष मोर्चा एवं सहयोगी संगठनों द्वारा जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। संगठन का आरोप है कि बिछिया एसडीएम द्वारा कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई, जबकि पीड़ित जनता की समस्याओं को सुनने और रखने के लिए किसी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।
जन संघर्ष मोर्चा के संयोजक विवेक पवार ने बताया कि ध्वनि विस्तारक यंत्र के उपयोग के संबंध में प्रशासन को आवेदन दिया गया था, लेकिन इस पर भी प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसके बावजूद वन अधिकारों से वंचित एवं विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे सैकड़ों ग्रामीण और आदिवासी आज बिछिया मुख्यालय पहुंच रहे हैं।
संगठन का कहना है कि वन अधिकारों के लंबित मामलों, वन विभाग की कार्यप्रणाली तथा प्रशासन की उदासीनता को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। इसी कारण आंदोलन के विभिन्न स्वरूपों पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रमों में “न्याय दो या जेल दो” के नारे के साथ जेल भरो आंदोलन, अनुविभागीय वन अधिकारी कार्यालय का घेराव अथवा एसडीएम कार्यालय का घेराव शामिल है।
जन संघर्ष मोर्चा के अनुसार आंदोलन का अंतिम स्वरूप दोपहर एक बजे उपस्थित जनसमूह की राय और परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाएगा। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय आंदोलनों को रोकने का प्रयास कर रहा है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
आज होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। वहीं आंदोलनकारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे वन अधिकारों और जनता के अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
