महाकाल जमीन खरीदी में 97 करोड़ के घोटाले का आरोप, एक रुपये में सौंप दी गईं 500 करोड़ की सरकारी संपत्तियां

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्स – उज्जैन में महाकाल मंदिर से जुड़ी जमीन खरीदी और शासकीय संपत्तियों के कथित हस्तांतरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष और कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में शिकायत दर्ज कर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं।
एक रुपये में सौंपे जाने का आरोप, सवालों में सरकारी संपत्तियां
शिकायत के अनुसार करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की ऐतिहासिक शासकीय संपत्ति कोठी महल को मात्र एक रुपये में एक संस्था को सौंप दिया गया। इसी तरह लगभग 500 करोड़ रुपये कीमत की विक्रम कीर्ति मंदिर की जमीन भी प्रतीकात्मक राशि पर अन्य संस्था को हस्तांतरित करने का आरोप लगाया गया है।
वही भरत पोरवाल का दावा है कि यह पूरा मामला सरकारी संपत्तियों को नियमों के विपरीत निजी संस्थाओं के हवाले करने का है। शिकायत में पूर्व सांसद और आलोट विधायक चिंतामण मालवीय के मीडिया बयान की सीडी भी साक्ष्य के तौर पर संलग्न की गई है।
महाकाल जमीन खरीदी में 97 करोड़ के भुगतान पर सवाल
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप महाकाल मंदिर के लिए की गई जमीन खरीदी को लेकर लगाए गए हैं। आरोप है कि कलेक्टर रोशन सिंह, महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक और अतेन्द्र गुर्जर सहित अन्य अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए करीब 97 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
दावा किया गया है कि यह राशि सीधे अधिकारियों से जुड़े खातों में भेजी गई। शिकायतकर्ता ने कहा कि इस पूरे मामले का खुलासा स्टेट फाइनेंस इंटेलिजेंस सेल की जांच और 24 मई 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आया।
“संगठित गिरोह बनाकर शासन को पहुंचाया नुकसान”
भरत पोरवाल ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से संगठित नेटवर्क बनाकर शासन को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया। उन्होंने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
इस शिकायत की प्रतिलिपि दिग्विजय सिंह को भी भेजी गई है, जिससे मामला अब राजनीतिक रूप से भी गरमाता नजर आ रहा है।
विपक्ष के आरोपों से गरमाई राजनीति
महाकाल लोक और उज्जैन विकास परियोजनाओं को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब सीधे करोड़ों रुपये के कथित भुगतान और शासकीय संपत्तियों के हस्तांतरण के आरोप सामने आने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला मध्यप्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक और आर्थिक घोटालों में शामिल हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर EOW की प्रारंभिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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