रक्षाबंधन से चार दिन पहले वनग्राम तेंदुभर्रा में स्थित दुर्गावती कन्या आश्रम में लगा ताला

Revanchal
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छात्राओं को समय से पहले दी छुट्टी, बुधवार को न चौकीदार मिले ,अधीक्षिका भी नदारत

सभी अधीक्षकों को नियमित रहने के आदेश ,इसके बावजूद शासन प्रशासन के निर्देशों उड़ा रहे धज्जियां

दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग। विकासखंड के वनग्राम धुरकूटा के समीप तेंदुभर्रा गांव में संचालित जनजातीय कार्य विभाग के वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या आश्रम में रक्षाबंधन पर्व के मद्देनजर छात्राओं को निर्धारित अवकाश से कई दिन पहले ही घर भेजे जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुछ छात्राओं को 24 अगस्त सोमवार और शेष छात्राओं को 25 अगस्त मंगलवार को ही छुट्टी दे दी गई। बुधवार को आश्रम परिसर के मुख्य गेट पर ताला लगा मिला।


जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाना है। ऐसे में पर्व से तीन-चार दिन पहले ही छात्राओं को छुट्टी देकर आश्रम बंद कर दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। बुधवार को मौके पर आश्रम के बाहरी बाउंड्रीवाल के मुख्य गेट के साथ-साथ अंदर के चैनल गेट पर भी ताला लगा देखने को मिला। खास बात यह रही कि मौके पर न तो कोई चौकीदार मौजूद था और न ही अधीक्षिका उपस्थित मिलीं।


शासकीय अवकाश से पहले ही बंद हुआ आश्रम
आसपास के ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार आश्रम में रहने वाली छात्राओं को रक्षाबंधन के लिए उनके गृहग्राम भेज दिया गया है। बताया गया कि कुछ छात्राओं को सोमवार और शेष को मंगलवार को ही पूर्ण अवकाश दे दिया गया था। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि निर्धारित अवकाश से पहले आश्रम को बंद करने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसकी अनुमति किससे ली गई थी।


क्या खर्च में बचत के लिए उठाया कदम?
आश्रम में करीब 50 से 60 छात्राओं के निवास करने की जानकारी सामने आई है, हालांकि छात्राओं की वास्तविक संख्या की पुष्टि विभागीय रिकॉर्ड से होना बाकी है। आरोप है कि छात्राओं के भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए मिलने वाले शासकीय आवंटन में बचत करने के उद्देश्य से समय से पहले छुट्टी दी गई हो सकती है। चार दिनों तक छात्राओं के भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च बचने की आशंका जताई जा रही है।
लोगो ने पूरे मामले को आश्रम संचालन में मनमानी से जोड़ते हुए विभागीय अधिकारियों से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रावास जैसे संस्थान को निर्धारित नियमों और अवकाश आदेश के अनुसार ही संचालित किया जाना चाहिए। बिना स्पष्ट जानकारी या अनुमति के छात्राओं को समय से पहले छुट्टी देना गंभीर लापरवाही का विषय है।


जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविकता
हालांकि छात्राओं को समय से पहले छुट्टी देने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा, यह विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यह भी जांच का विषय है कि रक्षाबंधन के लिए छात्राओं को कितने दिन का अधिकृत अवकाश स्वीकृत था और आश्रम बंद करने की अनुमति किस अधिकारी से ली गई थी। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

इनका कहना है
आपके माध्यम से जानकारी मिली है में संकुल प्राचार्य को भेज कर जांच करवा लेता हु
अमोल सिंह मरावी बी ई ओ बजाग

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