डिंडौरी से मंडला तक… कृषि विभाग में भ्रष्टाचार का खेल बेनकाब! किसानों की योजनाओं में करोड़ों का भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप

Revanchal
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उपसंचालक अश्वनी झरिया पर EOW का शिकंजा, फिर भी मिला बड़ा जिला… आखिर किसका संरक्षण?

दैनिक रेवांचल टाइम्स विशेष रिपोर्ट
मंडला/डिंडौरी — किसानों के नाम पर संचालित होने वाली शासकीय योजनाओं को कैसे कुछ भ्रष्ट अधिकारी अपनी निजी कमाई का जरिया बना लेते हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण कृषि विभाग में सामने आ रहा है। डिंडौरी जिले में पदस्थ रहे तत्कालीन उपसंचालक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग अश्वनी झरिया पर जबलपुर की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद भी सिस्टम की मेहरबानी ऐसी रही कि उन्हें और बड़ा जिला सौंप दिया गया।


वही अब मंडला जिले में पदस्थ होते ही इनके कथित कारनामों की परतें खुलना शुरू हो गई हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार डिंडौरी जिले में किसानों की योजनाओं में भारी अनियमितताओं, शासकीय राशि के बंदरबांट और योजनाओं में भ्रष्टाचार को लेकर EOW ने मामला दर्ज किया। लेकिन सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप हों, उन्हें दंडित करने के बजाय “इनाम” स्वरूप बड़ा जिला क्यों दिया जाता है? आखिर कहा है देश कानून और नियंम जो कि जो जितना भ्रष्टाचार करेगा वह उतना बड़ा पद में आसीन रहेगा ओर पुरुस्कार भी मिलेगा

मंडला में भी किसानों की योजनाओं में शुरू हुआ खेल…!

वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंडला जिले में पदस्थापना के बाद कृषि विभाग में कई तरह की शिकायतें सामने आने लगी हैं। आरोप हैं कि किसानों के नाम पर संचालित योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। फर्जी बीज वितरण, बिना लाभार्थी के योजना संचालन, रिकॉर्ड में हेराफेरी और विभागीय संसाधनों का दुरुपयोग जैसे मामले लगातार चर्चा में हैं।


विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि खाद और कीटनाशक दुकानदारों से कथित रूप से “हप्ता-महीना” वसूली का नेटवर्क सक्रिय है, जिसमें विभागीय वाहन चालक तक की भूमिका बताई जा रही है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये के घोटाले उजागर हो सकते हैं।


किसानों का हक खा रहा भ्रष्ट तंत्र
एक तरफ किसान मौसम की मार, महंगे खाद-बीज और फसल नुकसान से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग में बैठे जिम्मेदार अधिकारी योजनाओं की राशि में सेंधमारी कर रहे हैं। जिन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को राहत देना था, वही योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही हैं।


रेवांचल टाइम्स की मुहिम जारी
दैनिक रेवांचल टाइम्स लगातार किसानों के पक्ष में आवाज उठाते हुए कृषि विभाग में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार, घोटाले और गबन की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित कर रहा है। प्रकाशित खबरों को अब जनसमर्थन भी मिलने लगा है और किसान संगठन खुलकर मैदान में उतर रहे हैं।


किसान युवा मोर्चा भी आया मैदान में
रेवांचल टाइम्स में लगातार प्रकाशित हो रही खबरों को संज्ञान में लेते हुए किसान युवा मोर्चा ने भी इस पूरे मामले में लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा और किसानों के हक की लड़ाई सड़क से लेकर शासन स्तर तक लड़ी जाएगी।


अब देखना यह होगा कि कृषि विभाग में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार के इस खेल पर शासन-प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर हमेशा की तरह जांच के नाम पर फाइलें दबा दी जाएंगी। और रेवांचल टाईम्स की भ्रष्टाचार ग़बन घोटाले के खिलाफ जारी रहेगी कि मुहिम…..
मुकेश श्रीवास की कलम से

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