दैनिक रेवांचल टाइम्स – हिंदू परंपरा में मंगला गौरी व्रत को अत्यंत शुभ और फलदाई माना गया है यह व्रत सावन माह में रखा जाता है विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए इसे करती है यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है जिन्हें सौभाग्य और अखंड सुहाग की देवी माना जाता है पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धा से पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में प्रेम सौहार्द और स्थिरता बनी रहती है
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
व्रत की शुरुआत प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र पहनने से होती है सूर्योदय से पहले स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ कर एक चौकी स्थापित करें और उसे पर लाल रंग का कपड़ा बिछाए इस पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें तथा गंगाजल से स्थान को पवित्र करें आटे का दीपक बनाकर प्रज्वलित करें इसके बाद विधिपूर्वक शिव पार्वती की पूजा करें मत्रों का जाप करें चंदन अक्षत कुमकुम रोली सिंदूर फूल बेलपत्र धूप दीप निवेद पान सुपारी लॉन्ग फल मिठाई से भगवान की पूजा करें साथ ही माता पार्वती को सुहाग का सामान चढ़ाई पूजन के बाद आरती करें इसके बाद मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें पूजा समाप्त होने पर सभी को प्रसाद वितरण कर अपनी क्षमता के अनुसार ब्राह्मणों को दान करें
मंगला गौरी व्रत पूजा मंत्र
ओम उमा माहेश्वराय नमः मंत्र का पूजन के दौरान जप करें
मंगला गौरी व्रत नियम
वृति को दिन में एक बार ही भोजन करना चाहिए पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि यह व्रत लगातार 5 वर्षों तक किया जाए तो पांचवें वर्ष सावन की अंतिम मंगलवार को उद्यापन के बिना व्रत को पूर्ण नहीं माना जाता श्रद्धा और नियम के साथ किया गया मंगला गौरी व्रत जीवन में सुख और सौभाग्य प्रदान करता है कुंडली में मंगल दोष के प्रभाव को दूर करने के लिए यह व्रत बहुत प्रभावी माना जाता है मंगला गौरी व्रत करने से जीवन में सुख समृद्धि आती है साथ ही संतान से जुड़ी मुश्किलों को भी दूर करने में यह व्रत सहायक माना जाता है सावन की महीने में यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शांति बल्कि पारिवारिक खुशहाली प्राप्त होती है अविवाहित कन्याओं के लिए भी यह व्रत विवाह की बाधाओ को दूर कर मनपसंद जीवनसाथी दिलाने में मददगार साबित होता है!
16 की संख्या का है विशेष महत्व
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया मंगला गौरी व्रत में 16 संख्या का विशेष महत्व माना गया है इसलिए माता को 16 माला 16 लॉन्ग 16 सुपारी 16 इलायची 16 पान 16 लड्डू 16 चूड़ियां सुहाग की सामग्री फल मिठाई अर्पित की जाती हैं इसके अलावा पांच प्रकार के सूखे मेवे सात प्रकार की धन्य गेहूं उड़द मूंग चना जो चावल और मसूर भी चढ़ने की परंपरा है पूजा के बाद मंगला गौरी व्रत की कथा का श्रवण किया जाता है और दिनभर माता पार्वती का स्मरण करते हुए एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए
कितनी मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे
सावन के दौरान कुल चार मंगलवार मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे पहले 4 अगस्त दूसरा 11 अगस्त तीसरा 18 अगस्त और चौथा 25 अगस्त को पड़ेगा 11 अगस्त को पढ़ने वाले दूसरे मंगला गौरी व्रत के दिन मासिक शिवरात्रि का सहयोग रहेगा जबकि 25 अगस्त को भौम प्रदोष व्रत भी होगा ऐसे शुभ संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा का विशेष फल मिलेगा
