आवेदक की गौशाला तोड़कर लौटी प्रशासनिक टीम
वर्षों से बंद रास्ता, कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति; न्याय के लिए भटक रहा परिवार
रेवांचल टाइम्स मण्डला/बिछिया बिछिया तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत अहमदपुर में प्रशासनिक कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार शासकीय भूमि पर वर्षों से किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए आधा दर्जन से अधिक बेदखली आदेश जारी होने के बावजूद गुरुवार 11 जून को भी प्रशासन अतिक्रमण हटाने में असफल रहा।हैरानी
की बात यह है कि जिस अतिक्रमण को हटाने राजस्व और पुलिस अमला पहुंचा था, उसे यथावत छोड़ दिया गया, जबकि शिकायतकर्ता की गौशाला तोड़कर कार्रवाई की खानापूर्ति कर दी गई।गुरुवार को नायब तहसीलदार अंजनिया के नेतृत्व में राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम अहमदपुर पहुंची। ग्रामीणों और आवेदक परिवार को उम्मीद थी कि वर्षों पुराना विवाद खत्म होगा और शासकीय रास्ते से अतिक्रमण हटेगा, लेकिन कई घंटे चली कार्रवाई के बाद टीम बिना वास्तविक कब्जा हटाए वापस लौट गई।सूत्रों
से प्राप्त जानकारी के अनुसार अहमदपुर निवासी रामप्रसाद साहू के निर्माणाधीन मकान एवं निजी भूमि के सामने स्थित शासकीय रास्ते पर कुंजबिहारी साहू, नेतराम साहू एवं रुकमणी साहू द्वारा वर्षों पहले पक्का निर्माण कर कब्जा कर लिया गया। इस अतिक्रमण के कारण रामप्रसाद साहू के परिवार का निस्तारी मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।
परिवार का आरोप है कि रास्ता बंद होने के कारण मकान का उपयोग तक प्रभावित हो रहा है और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है।
आवेदन पर आवेदन, आदेश पर आदेश, फिर भी कार्रवाई शून्य
न्याय की उम्मीद में रामप्रसाद साहू, उनकी पत्नी कमला बाई तथा लगभग 70 वर्षीय वृद्ध मां फांफा बाई ने पटवारी से लेकर नायब तहसीलदार, तहसीलदार, एसडीएम, थाना, पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर तक कई आवेदन दिए। शिकायतों के आधार पर नायब तहसीलदार द्वारा कई बार बेदखली आदेश भी जारी किए गए, लेकिन हर बार कार्रवाई अधूरी रह गई।
बताया जाता है कि गुरुवार की कार्रवाई भी पूर्व में जारी अंतिम बेदखली आदेश के पालन के लिए की गई थी, लेकिन परिणाम पहले जैसा ही निकला। प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा, घंटों मौजूद रहा, लेकिन अतिक्रमण का मूल स्वरूप जस का तस बना रहा।
कब्जाधारी का पक्का निर्माण सुरक्षित, शिकायतकर्ता की गौशाला ध्वस्त ग्रामीणों और आवेदक परिवार का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कब्जाधारियों द्वारा बनाए गए पक्के निर्माण को हाथ तक नहीं लगाया गया।इसके
विपरीत रामप्रसाद साहू के मकान से लगी उनकी गौशाला को तोड़ दिया गया, जहां परिवार द्वारा गौसेवा के लिए गायें रखी जाती थीं।
परिवार का कहना है कि अब उनकी गायें खुले आसमान के नीचे भीषण गर्मी और आगामी बारिश का सामना करने को मजबूर होंगी। दूसरी ओर अतिक्रमणकर्ता के पक्के कमरे के सामने लगे कुछ लकड़ी के खंभे और कंटीले तार हटाकर कार्रवाई पूरी होने का दावा कर दिया गया।
वृद्ध मां लड़ रही न्याय की लड़ाई
रामप्रसाद साहू पेशे से शिक्षक हैं और पन्ना जिले में पदस्थ हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों के कारण वे हर सुनवाई और कार्रवाई में उपस्थित नहीं हो पाते। ऐसे में उनकी अस्वस्थ मां फांफा बाई वर्षों से बेटे की जमीन और रास्ता बचाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं।
परिवार का कहना है कि लगातार प्रशासनिक उपेक्षा के कारण वे मानसिक तनाव में हैं। उनका आरोप है कि यदि आधा दर्जन से अधिक आदेशों के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया जा रहा, तो फिर ऐसे आदेश जारी करने का औचित्य क्या है
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राजस्व विभाग स्वयं अतिक्रमण मान चुका है और कई बार बेदखली आदेश जारी कर चुका है, तो फिर कार्रवाई प्रभावी क्यों नहीं हो पा रही। क्या प्रशासन अपने ही आदेशों का पालन कराने में असमर्थ है या फिर किसी दबाव में कार्रवाई को अधूरा छोड़ रहा है 9 जून की जनसुनवाई में एसडीएम को आवेदन देने के बाद हुई इस कार्रवाई से परिवार को न्याय की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा। अब पीड़ित परिवार पुनः कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग करने की तैयारी में है।
बड़ा सवाल आखिर प्रशासन कब तक आदेश जारी कर खानापूर्ति करता रहेगा क्या किसी बड़े विवाद, हिंसक टकराव या अप्रिय घटना का इंतजार किया जा रहा है यदि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण साबित हो चुका है तो उसे हटाने में इतनी हिचकिचाहट क्यों
अहमदपुर का यह मामला अब केवल एक रास्ते या जमीन का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा हो गया है।
