चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली? जबलपुर में 112 डायल पुलिस पर गंभीर सवाल

Revanchal
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सुनसान इलाकों में खड़ी कारों को बनाया जा रहा निशाना, किशोरों और युवाओं को डराकर ऑनलाइन वसूली के आरोप

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर संपादक अतुल कुमार
शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात 112 डायल पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि रात के समय सुनसान स्थानों पर खड़ी चारपहिया वाहनों की चेकिंग के नाम पर किशोरों और युवाओं को डराया-धमकाया जा रहा है तथा वैधानिक कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से उनसे अवैध रूप से धनराशि वसूली जा रही है।

विजयनगर, जीरो डिग्री, शताब्दीपुरम, दीनदयाल चौक के आसपास, मदनमहल, सिविल लाइन तथा ऐसे कई इलाके, जहां रात के समय लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम रहती है, कथित रूप से इस तरह की गतिविधियों के केंद्र बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन स्थानों पर खड़ी कारों की तलाशी और पूछताछ के दौरान यदि वाहन में किशोर या युवा मिलते हैं तो उन्हें उनके माता-पिता को बुलाने, थाने ले जाने या गंभीर प्रकरण दर्ज करने का भय दिखाया जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन कर रहा है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होना चाहिए। यदि अपराध है तो एफआईआर दर्ज हो, यदि मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है तो चालान बनाया जाए और सरकारी रसीद दी जाए। लेकिन यदि किसी भी प्रकार की वैधानिक कार्रवाई किए बिना केवल भय का माहौल बनाकर निजी खातों में पैसे ट्रांसफर कराए जा रहे हैं, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

सूत्रों के अनुसार कई मामलों में कथित रूप से युवाओं से ₹2,000, ₹5,000, ₹10,000 से लेकर ₹20,000 तक की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर कराई जाती है। आरोप यह भी हैं कि यह राशि सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय किसी रिश्तेदार, परिचित या अन्य निजी बैंक खाते अथवा यूपीआई आईडी पर भेजने के लिए कहा जाता है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की श्रेणी में आ सकता है।

विशेष चिंता का विषय यह है कि कई किशोर और कॉलेज छात्र सामाजिक बदनामी या परिवार के डर से इस तरह की घटनाओं की शिकायत तक दर्ज नहीं कराते। कई अभिभावक भी विवाद से बचने के लिए पैसे देकर मामला समाप्त करना उचित समझते हैं। यही कारण है कि यदि ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो वे सामने नहीं आ पातीं और कथित रूप से यह सिलसिला लगातार बढ़ता जाता है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस को किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जांच करने का पूरा अधिकार है, लेकिन प्रत्येक कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए। किसी भी प्रकार का जुर्माना केवल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लगाया जा सकता है और उसकी विधिवत रसीद देना अनिवार्य होता है। किसी पुलिसकर्मी द्वारा किसी व्यक्ति से निजी खाते में राशि जमा कराने के लिए कहना या दबाव बनाना कानून सम्मत नहीं माना जा सकता। यदि ऐसा सिद्ध होता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ भ्रष्टाचार एवं अन्य आपराधिक धाराओं के तहत भी कार्रवाई संभव है।

सवाल यह भी है कि यदि किसी युवक-युवती को किसी सुनसान स्थान पर संदिग्ध परिस्थिति में पाया जाता है तो पुलिस का दायित्व उन्हें कानून की जानकारी देना, आवश्यक पूछताछ करना और आवश्यकता पड़ने पर थाने ले जाकर वैधानिक प्रक्रिया अपनाना है। लेकिन यदि कार्रवाई के स्थान पर केवल धन लेकर मामला समाप्त कर दिया जाता है, तो इससे कानून का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है और गलत प्रवृत्तियों को भी बढ़ावा मिलता है।

शहर के नागरिकों का कहना है कि पुलिस की चेकिंग व्यवस्था आवश्यक है और उसका स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे अपराध नियंत्रण में सहायता मिलती है। लेकिन यदि इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर कुछ लोग अपनी जेब भरने लगें तो इससे पूरी पुलिस व्यवस्था की साख प्रभावित होती है। ईमानदारी से कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों की छवि पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

यह भी आवश्यक है कि पुलिस विभाग ऐसे आरोपों को गंभीरता से ले। जिन इलाकों में इस प्रकार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, वहां की 112 डायल वाहनों की जीपीएस लोकेशन, ड्यूटी रिकॉर्ड, बॉडी कैमरा (यदि उपलब्ध हो), सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पुलिसकर्मियों के मोबाइल लेन-देन की जांच कराई जाए। यदि किसी निजी खाते में संदिग्ध परिस्थितियों में राशि ट्रांसफर हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

यदि किसी नागरिक के साथ वास्तव में इस प्रकार की घटना हुई है तो उसे बिना भय के पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त अथवा भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों के समक्ष साक्ष्यों सहित शिकायत दर्ज करानी चाहिए। केवल सोशल मीडिया पर चर्चा करने के बजाय विधिक शिकायत से ही दोषियों तक पहुंचा जा सकता है।

रेवांचल टाइम्स का स्पष्ट मत है कि पुलिस की वैधानिक चेकिंग का समर्थन होना चाहिए, लेकिन कानून के नाम पर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली, भयादोहन या निजी खातों में धन लेने जैसी शिकायतें यदि सत्य हैं तो उनकी उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है। कानून का सम्मान तभी बना रहेगा जब कानून लागू करने वाले भी उसी कानून के दायरे में जवाबदेह रहेंगे।

(नोट: यह समाचार नागरिकों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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