रात में पहुंचती हैं बसें… सुबह बचते हैं सिर्फ लोहे के टुकड़े! आखिर किसके संरक्षण में चल रहा करोड़ों का खेल?
रेवांचल टाइम्स | विशेष खोजी रिपोर्ट | डिंडौरी/विक्रमपुर
डिंडौरी जिले में करोड़ों रुपये के सरकारी राजस्व को ठिकाने लगाने का एक बड़ा खेल सामने आता दिखाई दे रहा है। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में जिन 94 बसों पर 20 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स बकाया दर्ज है, उनमें से 50 से ज्यादा बसें रहस्यमय तरीके से गायब हो चुकी हैं। सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में व्यावसायिक बसें आखिर हवा में उड़ गईं या फिर जिम्मेदारों की मिलीभगत से कबाड़ के ढेर में बदल दी गईं?
सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार विक्रमपुर क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में अवैध बस कटाई का अड्डा बनता जा रहा है। आरोप है कि देर रात टोचन वाहनों से पुरानी बसें यहां लाई जाती हैं और सुबह होने से पहले उनके पुर्जे अलग-अलग कर दिए जाते हैं। जब तक विभाग की नजर पड़ती है, तब तक बस का अस्तित्व ही समाप्त हो चुका होता है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि बिना आरटीओ की अनापत्ति (एनओसी) के कोई भी व्यावसायिक वाहन कबाड़ नहीं किया जा सकता, फिर आखिर किसके इशारे पर यह पूरा खेल चल रहा है? यदि नियमों का पालन हुआ है तो रिकॉर्ड कहां हैं? और यदि नियमों का पालन नहीं हुआ तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मामला केवल डिंडौरी तक सीमित नहीं बताया जा रहा। चर्चा है कि पड़ोसी जिलों और छत्तीसगढ़ से भी टैक्स बकायादार बसें विक्रमपुर लाई जा रही हैं। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह केवल टैक्स चोरी नहीं, बल्कि संगठित स्तर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का गंभीर मामला हो सकता है।
परिवहन विभाग ने करोड़ों रुपये के बकायादार बस संचालकों को नोटिस तो भेजे, लेकिन वसूली के नाम पर केवल 6 लाख रुपये ही जमा हो सके। सवाल उठता है कि नोटिस के बाद भी न बसें जब्त हुईं, न टैक्स वसूला गया और न ही गायब हो चुकी बसों का पता लगाया गया। क्या यह केवल लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी मजबूत गठजोड़ का संरक्षण?
विक्रमपुर के ग्रामीणों का आरोप है कि नई मस्जिद के आसपास संचालित कुछ कबाड़ यार्डों में लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। लोगों का कहना है कि रात में बसें आती हैं और सुबह तक उनका नामोनिशान मिट जाता है। यदि यह सच है तो स्थानीय प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब यह मामला केवल टैक्स वसूली का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी है। करोड़ों रुपये का राजस्व डूब गया, दर्जनों बसें गायब हो गईं और जिम्मेदार विभाग सिर्फ नोटिस जारी करने तक सीमित रहा।
जिला परिवहन अधिकारी दीपक भलावी ने कबाड़ यार्ड की जांच कराने और गायब बसों की जानकारी जुटाने की बात कही है। वहीं पुलिस ने भी जांच का आश्वासन दिया है। लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या इस बार भी जांच सिर्फ कागजों में सिमट जाएगी, या करोड़ों के इस कथित खेल के असली चेहरे बेनकाब होंगे?
रेवांचल टाइम्स के तीखे सवाल
20 करोड़ से अधिक टैक्स बकाया होने के बाद भी बसें कैसे गायब हो गईं?
बिना एनओसी के यदि बसें काटी गईं तो जिम्मेदार कौन है?
क्या परिवहन विभाग, स्थानीय प्रशासन और कबाड़ कारोबारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी?
सरकार के करोड़ों रुपये के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
क्या इस पूरे मामले की आर्थिक अपराध शाखा या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी?
(नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों, स्थानीय लोगों के आरोपों और संबंधित अधिकारियों के बयानों पर आधारित है। आरोपों की निष्पक्ष जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा किया जाना आवश्यक है।)
