दैनिक रेवांचल टाइम्स डिंडौरी। जिला मुख्यालय में अवैध होर्डिंग, बैनर और पोस्टरों को हटाने के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी (एसडीएम) डिंडौरी द्वारा 9 जुलाई 2026 को जारी किए गए आदेश के 13 दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई अधूरी पड़ी हुई है। नगर परिषद द्वारा चलाया गया अभियान अब सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि परिषद ने केवल दिखावे के लिए फ्लेक्स और बैनर हटाए, लेकिन उनके लोहे के फ्रेम और बांस के स्टैंड यथावत छोड़ दिए, जिसके चलते कुछ ही दिनों में उन्हीं स्थानों पर दोबारा अवैध होर्डिंग और शुभकामना संदेशों की भरमार शुरू हो गई है।
नगर परिषद की इस आधी-अधूरी कार्रवाई से नाराज एक युवक पिछले कई दिनों से लगातार मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंप रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रशासनिक आदेशों का पालन केवल कागजों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। युवक ने नगर परिषद क्षेत्र के सभी सार्वजनिक स्थानों से अवैध फ्लेक्स, होर्डिंग, उनके लोहे के ढांचों और बांस के स्टैंड को स्थायी रूप से हटाने की मांग की है।
सबसे गंभीर मामला राज्य परिवहन बस स्टैंड का सामने आया है। यहां वर्षों से लगे लोहे के बड़े-बड़े फ्रेम आज भी खड़े हैं, जबकि उनके ठीक ऊपर करीब 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। हैरानी की बात यह है कि पूर्व में भी इसी तरह की दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने उससे कोई सबक नहीं लिया।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद ने एसडीएम के आदेश का केवल औपचारिक पालन किया है। शहर के प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थलों से केवल फ्लेक्स हटाकर कार्रवाई पूरी होने का दावा कर दिया गया, जबकि असली समस्या पैदा करने वाले लोहे के ढांचे और स्टैंड को हटाने की जहमत तक नहीं उठाई गई। यही वजह है कि कुछ ही दिनों में शहर के कई हिस्सों में दोबारा अवैध बैनर और होर्डिंग दिखाई देने लगे हैं।
प्रश्न यह भी उठ रहा है कि जब प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए थे, तो नगर परिषद ने अधूरी कार्रवाई क्यों की? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं? आखिर जनता की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
शिकायतकर्ता का कहना है कि वह लगातार ज्ञापन देकर नगर परिषद को सचेत कर रहा है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिल रहा है। यदि समय रहते इन लोहे के फ्रेमों और बांस के स्टैंड को नहीं हटाया गया और कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर परिषद और संबंधित अधिकारियों की होगी।
अब देखना यह होगा कि एसडीएम के आदेश के बावजूद नगर परिषद कब तक केवल कागजी कार्रवाई करती रहेगी और कब शहर को अवैध होर्डिंगों के इस जाल से स्थायी मुक्ति मिलेगी। फिलहाल डिंडौरी की जनता के मन में यही सवाल गूंज रहा है कि आखिर प्रशासनिक आदेशों का वास्तविक पालन कब होगा।
