दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला। दिनांक 02 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि में कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन वनमंडल अंतर्गत खापा बफर परिक्षेत्र की कुम्हादेही बीट के ग्राम पर्रापुर (स्कूल टोला), थाना बैहर, तहसील परसवाड़ा, जिला बालाघाट में एक बाघ के हमले में श्रीमती सुगनी बाई, पति बुधराम बैगा की मृत्यु हो गई थी।
घटना के तत्काल बाद कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई तथा संबंधित बाघ की पहचान कर उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर अन्यत्र स्थानांतरित करने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। इस हेतु क्षेत्र मे कैमरा ट्रैप लगाए थे, गस्ती दल बनाकर सर्चिंग का कार्य प्रारम्भ किया गया था एवं हाथी दल की सहायता से भी क्षेत्र का सघनता से निरिक्षण किया जा रहा था l इस दौरान क्षेत्र मे एक मादा बाघ (T- 27) आयु लगभग 14 वर्ष क्षेत्र मे ग्राम के निकट विचरण करते हुए पाई गई । यह भी ज्ञात हुआ कि उक्त बाघिन पूर्व में भी ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास विचरण करती रही थी एवं कल रात्रि मे इसके द्वारा ग्राम के समीप गारा करने का प्रयास किया था l इन परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए एवं मादा बाघ का समस्या जनित होने के कारण प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश शासन, भोपाल से बाघिन के रेस्क्यू एवं पुनर्स्थापन की
अनुमति प्राप्त होने के उपरांत आज दिनांक 03 अगस्त 2026 को अपराह्न में कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बाघिन का सफल एवं सुरक्षित रेस्क्यू किया। यह कार्रवाई क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी एवं उपसंचालक (बफर) सुश्री अमिता के. बी. के मार्गदर्शन तथा अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में हाथी दल की सहायता से संपन्न हुई। वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल द्वारा बाघिन को सुरक्षित रूप से निश्चेत कर उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बाघिन के कैनाइन दांत अत्यधिक घिसे हुए पाए गए। संभावना व्यक्त की गई कि इसी कारण वह आसान शिकार की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास विचरण कर रही थी।
ग्रामीणों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तथा प्राप्त शासकीय अनुमति के अनुसार बाघिन को विशेष परिवहन वाहन के माध्यम से वन विहार, भोपाल के लिए सुरक्षित रूप से रवाना कर दिया गया है।
कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन आमजन से अपील करता है कि वन्यजीवों की गतिविधियों की सूचना तत्काल वन विभाग को दें तथा किसी भी स्थिति में स्वयं जोखिम उठाने का प्रयास न करें। विभाग मानव एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
