बिना अनुमति के रेस्टहाउस में लगे पुराने धड़ल्ले से कर दी पेड़ छटाई

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स – अंजनिया मंडला पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को लेकर जहां सरकार लगातार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वृक्षारोपण को बढ़ावा दे रही है, वहीं अंजनिया रेस्टहाउस में केम्पस के अंदर लगे नीम के पेड को अपनी निजी स्वार्थ पूर्ति के लिए वर्षों पुराने पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया।सूत्रों से जानकारी अनुसार ताजा मामला अंजनिया रेस्ट हाउस परिसर का सामने आया है,

जहां एक पुराने और विशाल पेड़ की मोटी डाल को बिना किसी वैधानिक अनुमति के काट दिया गया।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह पेड़ कई वर्षों पुराना था और परिसर की पहचान के रूप में भी जाना जाता था। अचानक इसकी बड़ी डाल काटे जाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा, बल्कि इससे लापरवाही भी सामने आई। बताया जा रहा है कि डाल काटने के दौरान बिजली के खम्बे में लगी तारों पर गिर गई, जिससे तार टूट गए और क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई।


घटना के बाद कुछ समय तक इलाके में बिजली बंद रही, जिससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि बिजली के तार टूटने के कारण किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। यदि उस समय आसपास कोई व्यक्ति मौजूद होता, तो करंट लगने जैसी गंभीर घटना भी घट सकती थी।


स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पौधारोपण अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग नियमों को ताक पर रखकर पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया भी दर्शाता है।


इस मामले की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में बिना अनुमति के किसी भी पेड़ की कटाई न हो। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि ऐसे मामलों में यदि कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो हरित क्षेत्र लगातार घटता जाएगा और इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।


वहीं, विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर टूटे हुए तारों की मरम्मत कर आपूर्ति बहाल की। अधिकारियों ने भी माना कि यह घटना गंभीर लापरवाही का परिणाम है और इससे बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।


वही इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम वास्तव में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर हैं, या फिर यह केवल कागजी योजनाओं तक ही सीमित रह गया है। जरूरत इस बात की है कि समाज का हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और पेड़ों की रक्षा के लिए आगे आए, तभी हरित भविष्य की कल्पना साकार हो ।

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