दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मंडला, गुरुवार को मंडला के कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे, पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा, अपर कलेक्टर राजेंद्र कुमार सिंह, जिला पंचायत सीईओ शाश्वत सिंह मीना, एसडीएम सीएल वर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण का चुटका गांव गये थे, जहां 2800 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना प्रस्तावित है।
कलेक्टर ने परियोजना से प्रभावित होने वाले गांव के उपस्थित जन समुदाय को बताया कि चुटका परमाणु परियोजना से विस्थापित परिवार के दोहरा विस्थापन को लेकर गोंझी में बने छोटे मकान को बङा बनाने के लिए 5 लाख रुपए और 7 लाख रुपए जमीन की राशि बढ़ाकर लगभग 12 लाख रुपए देने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र परिवार के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी को नियमानुसार उचित मुआवजा एवं विस्थापन पैकेज दिया जाएगा।
उपरोक्त चर्चा के संबंध में चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादु लाल कुङापे और महिला मोर्चा की अध्यक्ष मीरा बाई मरावी ने विज्ञप्ति जारी करके बताया है कि हमारी ग्राम सभा ने चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना की सैद्धांतिक मंजूरी 2009 में मिलने के बाद से ही इस परियोजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन को लिखित में अवगत करा दिया था। क्योंकि हमलोग एक बार बरगी बांध से विस्थापन की त्रासदी भोग चुके हैं।
फिर भी मंडला प्रशासन ने 29 जून 2012 को भू अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर प्रत्येक प्रभावित गांव में धारा- 4 का नोटिस जारी कर दिया। इस नोटिस का भी ग्रामीणों कलेक्टर मंडला को लिखित में विरोध दर्ज कराया था।सभी विरोधों को दरकिनार करते हुए जबलपुर कमिश्नर द्वारा 11 दिसम्बर 2015 को परियोजना के पक्ष में अवार्ड पारित कर दिया गया। जमीन का मुआवजा लगभग 3.75 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर निर्धारित किया गया है,जो काफी कम है और काश्तकार नाराज है।
उन्होंने कहा कि काश्तकारों ने नारायणगंज के सभी बैंकों में लिखित आवेदन दिया था कि हमलोगों के खाते में भू-अर्जन की राशि जमा नहीं किया जाए। फिर भी खाते में जबरदस्ती राशि को डाल दिया गया। 22 सितम्बर 2015 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित केबिनेट बैठक में 41.49 हेक्टेयर गांव की निस्तारी भूमि परियोजना को दे दिया गया, जबकि बरगी बांध में बहुत से निस्तारी भूमि डूब चुके हैं।
उक्त निस्तारी भूमि की सहमति के लिए ग्राम सभा में तहसीलदार का लिखित प्रस्ताव आया था, जिसे ग्राम सभा ने नामंजूर कर दिया था। मध्यप्रदेश सरकार ने ग्राम सभा द्वारा पारित किसी प्रस्ताव का सम्मान नहीं किया गया, जबकि मंडला पांचवीं अनुसूची में अधिसूचित है और पेसा कानून प्रचलित है। इसी बीच 16 मार्च 2013 को मंडला प्रशासन द्वारा पाठा पंचायत की विशेष ग्राम सभा का आयोजन करवाया गया और परियोजना की मंजूरी के लिए दबाव बनाया गया।
तब जाकर उस बैठक में चुटका परियोजना को लेकर ग्राम सभा ने सशर्त मंजूरी दिया था कि 26 बिन्दुओं पर कार्यवाही होगा तो गांव खाली किया जाएगा। जिसमें पहला मांग है कि अर्जित भूमि का मुआवजा 60 लाख रुपये हेक्टेयर दिया जाए।जो नर्मदा घाटी में सरदार सरोवर बांध के किसानों को उच्चतम न्यायालय के आदेश पर दिया गया है।
प्रत्येक विस्थापित परिवार को कृषि योग्य 5 एकङ जमीन दिया जाए।समस्त विस्थापित परिवारों के वयस्क बेरोजगार लङका और लङकी को उसकी योग्यता के अनुसार शासकीय नौकरी प्रदान की जाए। परन्तु 13 साल बाद भी आजतक इस पर अमल नहीं किया गया है। उन्होंने बताया की समूचा गांव सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि ग्राम सभा द्वारा पारित 26 बिन्दुओं पर कार्यवाही पूर्ण हुए बिना गांव खाली नहीं करेंगे।
ज्ञात हो कि परियोजना से प्रभावित गांव चुटका के लोग बरगी बांध से डूब के बाद वन भूमि पर काबिज 48 काश्तकार और राजस्व की घास जमीन पर 35 लोग कब्जा कर वर्षों से खेती कर रहे हैं। परियोजना प्रभावित गांव कुंडा के वन भूमि पर काबिज 35 काश्तकारों को वन अधिकार पत्र नहीं दिया गया है। जबकि वर्तमान में लोग अभी काबिज जमीन पर खेती कर परिवार का जीवन यापन चला रहे हैं।
दूसरी ओर बरगी जलाशय में कार्यरत 45 मछुआरा सहकारी समिति में से 5 मछुआरा समितियों के 187 मछुआरा सदस्य परियोजना के सुरक्षा कारणों से जलाशय में मत्स्याखेट करने से वंचित हो जाएगा। उनके आजिविका की कोई योजना नहीं बनाई गई है। परियोजना के आसपास के आदिवासी समुदाय परियोजना से निकलने वाले रेडियोधर्मी विकिरण को लेकर सशंकित हैं और विरोध कर रहे हैं।
