राधा कृष्ण पुरवा ट्रस्ट की उपेक्षा पर कुर्मी समाज की चिंता

Revanchal
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मंदिर संरक्षण और ट्रस्ट में समाज की सहभागिता की उठी मांग

दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला/मंडला जिले के पुरवा में राधा कृष्ण ट्रस्ट मंदिर और कारियागांव स्थित राधा कृष्ण पुरवा ट्रस्ट की भूमि और मंदिर व्यवस्था को लेकर कुर्मी समाज ने नवागत कलेक्टर के समक्ष गंभीर चिंता व्यक्त की है। समाज के पदाधिकारियों एवं जागरूक नागरिकों ने ज्ञापन सौंपकर ट्रस्ट की सुरक्षा, मंदिर के संरक्षण तथा समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया कि लगभग 110 एकड़ भूमि वर्षों पूर्व कुर्मी समाज के मालगुजार द्वारा धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य से दान की गई थी। वर्तमान में यह ट्रस्ट शासन के अधीन है और जिला कलेक्टर इसके शासक माने जाते हैं। पूर्व में ट्रस्ट का संचालन स्थानीय सामाजिक लोगों द्वारा किया जाता था, लेकिन ट्रस्टियों के निधन के बाद इसकी व्यवस्था पूरी तरह प्रशासनिक नियंत्रण में चली गई।

समाज के लोगों का आरोप है कि उचित निगरानी और देखरेख के अभाव में पुरवा में दान की गई ट्रस्ट की भूमि जो करियागांव में स्थित हैं।उस पर अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं। शासन द्वारा समय समय पर खेतों की सीमांकन व्यवस्था और मेड़बंधान नहीं होने से भूमि की वास्तविक स्थिति लगातार प्रभावित हो रही है। साथ ही, हर वर्ष भूमि की नीलामी जिला मुख्यालय या तहसील स्तर पर किए जाने से स्थानीय किसानों को सही जानकारी नहीं मिल पाती। इस कारण समाज ने मांग की है कि आगामी समय में भूमि की नीलामी गांव स्तर पर पारदर्शी तरीके से कराई जाए ताकि वास्तविक जरूरतमंद किसानों को लाभ मिल सके।

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष राधा कृष्ण मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़ा है। समाज के लोगों का कहना है कि मंदिर का रखरखाव वर्तमान व्यवस्था में संतोषजनक नहीं है। नियमित आरती और धार्मिक गतिविधियां भी व्यवस्थित रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं में निराशा है।

कुर्मी समाज ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ट्रस्ट में समाज के जिम्मेदार सदस्यों को सहभागिता दी जाए ताकि मंदिर की धार्मिक गरिमा, ट्रस्ट की भूमि की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था बेहतर तरीके से संचालित हो सके। समाज का कहना है कि यदि स्थानीय लोगों को जिम्मेदारी दी जाती है तो मंदिर और ट्रस्ट दोनों की स्थिति में सुधार संभव है।
वही अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मांग पर क्या निर्णय लेता है और वर्षों पुरानी इस धार्मिक एवं सामाजिक धरोहर के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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