हरियाली अमावस्या पर पेड़ लगाकर करें अपने जीवन को धन्य -पंडित संदीप ज्योतिषी

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्स – श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हर वर्ष हरियाली अमावस्या के नाम से बनाया जाता है इस तिथि पर विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है इस दिन नर्मदा स्नान दान पुण्य से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है
इस साल हरियाली अमावस्या पर काफी शुभयोग का निर्माण हो रहा है इस दिन है पुख योग सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ व्यतिपात योग का निर्माण हो रहा है

हरियाली अमावस्या के नाम से ही हरियाली का संदेश छिपा है यह पर्व हमें याद दिलाता है कि मानव जीवन के लिए वृक्ष कितने आवश्यक हैं स्वास्थ्य के लिए प्राणवायु छाया औषधि और फल जैसे अनगिनत वरदान हमें पेड़ों से ही मिलते हैं इसी कारण इस दिन वृक्षारोपण को पूर्ण कर्म के रूप में बताया है आज के चराचर जगत में वृक्षों के महत्व को भूलकर केवल अपने स्वार्थ पर ध्यान रह गया है और पितरों तथा देवी देवताओं के प्रति आस्था कम हो गई है जो साधक इस दिन थोड़ा समय निकालकर वृक्षारोपण पितृ तर्पण शिव पूजा और सरल दान का अभ्यास करता है उसके लिए यह अमावस्या आने वाले समय में नई शुरुआत का प्रतीक बन सकती है हरियाली अमावस्या का सार यही है कि जब धरती हरी होती है तब मन भी हरा भरा रहता है

 पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि लक्ष्मी प्राप्त करने के लिए तुलसी वाला बेलपत्र केले का वृक्ष लगाना चाहिए

आरोग्य प्राप्त करने के लिए पलाश ब्राह्मी अर्जुन और सूरजमुखी के पौधे लगाने चाहिए सौभाग्य के लिए अशोक नारियल बट वृक्ष लगाना चाहिए संतान की प्राप्ति के लिए नीम नागकेसर अश्वगंधा के वृक्ष लगाए सुख की प्राप्ति के लिए कदंब का पेड़ लगाना चाहिए खुशियां प्राप्त करने के लिए पारिजात मोगरा रातरानी के पौधे लगाना चाहिए इस प्रकार हरियाली अमावस्या के दिन वृक्षारोपण कर अपने जीवन को सद्गति प्रदान कर सकते हैं
वैदिक परंपरा के अनुसार हर अमावस्या की रात को चंद्रमा के अदृश्य होने से एक विशेष प्रकार की सूक्ष्म ऊर्जा सक्रिय हो जाती है यह समय साधना जप और रुद्राभिषेक के लिए उपयुक्त माना गया है ताकि बाहरी और भीतरी दोनों प्रकार की नकारात्मकता से रक्षा मजबूत हो सके हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में स्थिरता और सुरक्षा के भाव को बल मिलता है शिवलिंग पर जल दूध दही घी मधु शक्कर और नर्मदा जल से अभिषेक किया जाता है वस्त्र उपवस्त्र यज्ञोपवीत चंदन अक्षत रोली कुमकुम बिलपत्र धतूरा फल पुष्प धूप दीप निवेद अर्पित कर शांत मन से भगवान शिव की पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है हरियाली अमावस्या के दिन पितरों के नाम से जलतिल और तर्पण करें यह तर्पण नदी तट किसी पवित्र स्थान पर किया जा सकता है पितरों के नाम पर ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान देना शुभ माना जाता है
पंडित संदीप ज्योतिषी ने बताया कि हरियाली अमावस्या पर 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है जो कई देशों में दिखाई देगा भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा इस कारण इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा परंतु ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा सूर्य ग्रहण का असर 90 दिन तक रहता है दौरान कई लोगों की जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलता है ग्रहण को केवल नकारात्मक नहीं माना जाता बल्कि इसके सकारात्मक प्रभाव भी होते हैं जो जीवन में नए अवसर और परिवर्तन लेकर आते हैं!

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