मध्यान्ह भोजन का भुगतान लटका, व्यवस्था चलाने वालों पर आर्थिक संकट, शासन-प्रशासन शीघ्र दे ध्यान

Revanchal
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लंबित भुगतान से स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था पर उठने लगे सवाल…

दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला। जिले में शासकीय स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भोजन तैयार करने और बच्चों तक पहुंचाने वाली व्यवस्था से जुड़े स्व-सहायता समूहों एवं संबंधित रसोइयों का भुगतान समय पर नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब शासन की महत्वपूर्ण योजना के संचालन में लगे लोगों को ही समय पर भुगतान नहीं मिलेगा तो व्यवस्था आखिर कितने दिनों तक सुचारु रूप से चल सकेगी?
मध्यान्ह भोजन योजना का उद्देश्य स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय से जोड़ना है। लेकिन भुगतान में देरी के चलते योजना से जुड़े लोगों के सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी होने की बात कही जा रही है। सीमित संसाधनों में भोजन की व्यवस्था करने वाले समूहों के लिए समय पर भुगतान नहीं मिलना सीधे तौर पर उनकी कार्यक्षमता और व्यवस्था दोनों को प्रभावित कर सकता है।


कागजों में योजना, जमीन पर भुगतान का इंतजार
सरकार बच्चों के पोषण और शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन यदि योजना को जमीन पर संचालित करने वाले लोगों का भुगतान ही लंबित रहे तो इन दावों की हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में काम करने वाले समूहों के लिए समय पर राशि मिलना बेहद जरूरी है, क्योंकि उन्हें खाद्य सामग्री, ईंधन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए लगातार खर्च करना पड़ता है।


जिम्मेदार अधिकारी बताएं—क्यों अटका भुगतान?
मामले में संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम से जुड़े भुगतान में देरी क्यों हो रही है। भुगतान किस स्तर पर लंबित है, कितने हितग्राहियों अथवा समूहों का भुगतान बाकी है और उसे जारी करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।


बच्चों के भोजन से जुड़ा मामला, तत्काल हो भुगतान
मध्यान्ह भोजन महज एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि हजारों स्कूली बच्चों के पोषण और उनके विद्यालय से जुड़ाव से संबंधित महत्वपूर्ण व्यवस्था है। इसलिए भुगतान में अनावश्यक देरी को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर टालना उचित नहीं होगा। शासन एवं जिला प्रशासन को मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए लंबित भुगतान जारी कराने की दिशा में कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि योजना से जुड़े लोगों को राहत मिले और स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी लंबित भुगतान को लेकर कब तक कार्रवाई करते हैं और योजना से जुड़े लोगों को उनका हक कब तक मिलता है।

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