रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर अंधेरे में, करोड़ों के कारोबार पर संकट

Revanchal
5 Min Read

चार-पांच दिनों से बिजली गुल, कारीगरों का रोजगार प्रभावित; प्रशासन और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर।

शहर के लेमा गार्डन स्थित रेडीमेड गारमेंट एंड फैशन डिजाइन क्लस्टर में पिछले चार-पांच दिनों से जारी बिजली संकट ने वस्त्र उद्योग की कमर तोड़कर रख दी है। जिस क्लस्टर को प्रदेश में रेडीमेड वस्त्र निर्माण का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहां बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाने से उद्योगपति, व्यापारी और हजारों कारीगर परेशान हैं। लगातार बिजली गुल रहने के कारण उत्पादन कार्य ठप होने की कगार पर पहुंच गया है और करोड़ों रुपये के कारोबार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

यह विडंबना ही है कि एक ओर मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (एमपीईबी) भूमिगत विद्युत व्यवस्था और आधुनिक बिजली प्रबंधन के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जबलपुर के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्लस्टरों में से एक बिजली के लिए तरस रहा है। इस स्थिति ने विभागीय दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है।

गारमेंट क्लस्टर में बड़ी संख्या में सलवार-सूट, कुर्ता-पायजामा, स्कूल यूनिफॉर्म, लोवर, टी-शर्ट और अन्य रेडीमेड वस्त्रों का निर्माण किया जाता है। यहां तैयार होने वाले वस्त्र केवल मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तरप्रदेश और अन्य राज्यों तक भेजे जाते हैं। वर्तमान में बिजली संकट के कारण सिलाई, कटिंग, फिनिशिंग, प्रेसिंग और पैकेजिंग जैसे सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

व्यापारियों का कहना है कि अधिकांश मशीनें बिजली आधारित हैं। बिजली नहीं होने के कारण उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। जिन ऑर्डरों की डिलीवरी की समय सीमा तय है, उन्हें पूरा करना मुश्किल हो गया है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो व्यापारियों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ बाजार में अपनी विश्वसनीयता भी खोनी पड़ सकती है।

दूसरी ओर क्लस्टर में कार्यरत कारीगरों की स्थिति और भी चिंताजनक है। उत्पादन बंद होने से उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच बिना पंखे और कूलिंग व्यवस्था के काम करना भी मुश्किल हो गया है। कई इकाइयों में अंधेरा पसरा रहता है और कर्मचारी घंटों तक बिजली आने का इंतजार करते हैं।

व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि समस्या को लेकर विद्युत विभाग के अधिकारियों को कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार अलग-अलग कारण बताकर मामले को टाल दिया जाता है। कभी केबल फॉल्ट, कभी ट्रांसफार्मर पर अधिक लोड और कभी तकनीकी खराबी का हवाला दिया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकाला जा सका है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शहर का प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर लगातार कई दिनों तक बिजली संकट से जूझ रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या उद्योगों को सुचारू बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रशासन और विद्युत विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं है? जब उद्योगों से कर और राजस्व वसूला जाता है, तब मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है?

स्थानीय उद्योगपतियों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है। उनका कहना है कि उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन की बात करने वाली सरकार को पहले मौजूदा औद्योगिक इकाइयों की बुनियादी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और विद्युत विभाग इस गंभीर समस्या को कितनी प्राथमिकता देते हैं। फिलहाल गारमेंट क्लस्टर में पसरा अंधेरा केवल बिजली व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का भी प्रतीक बनता जा रहा है। हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़े इस मामले में यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो इसका असर पूरे वस्त्र उद्योग पर पड़ सकता है।

👁️ 30 views Views
Share This Article
Translate »