जबलपुर में कानून का डर खत्म? दिनदहाड़े बुजुर्ग महिला से लूट, जंगल में युवक की लाश… शहर आखिर किस दिशा में जा रहा है!

Revanchal
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जबलपुर। संस्कारधानी कहलाने वाला जबलपुर इन दिनों अपराधों की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जिसने आम आदमी के मन में डर और व्यवस्था पर सवाल दोनों पैदा कर दिए हैं। एक तरफ दिनदहाड़े 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को रिश्तेदारी का झांसा देकर बाइक पर बैठाया जाता है, फिर सुनसान इलाके में ले जाकर उसके गहने और नकदी लूट ली जाती है। दूसरी तरफ शहर के रांझी इलाके में जंगल के भीतर एक युवक की संदिग्ध हालत में लाश मिलती है। सवाल यह है कि आखिर जबलपुर में हो क्या रहा है? और उससे भी बड़ा सवाल… क्या अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है?
माढ़ोताल थाना क्षेत्र की घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। चौधरी मोहल्ला निवासी 75 वर्षीय रूकिया बाई चौधरी बिजली का बिल जमा करने करमेता गई थीं। उम्र के इस पड़ाव पर जहां एक बुजुर्ग महिला को सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए, वहां अपराधियों ने उनकी कमजोरी को ही अपना हथियार बना लिया। बाइक सवार दो युवक आए और बड़े अपनत्व से बोले… माताराम, आपको हमारी मम्मी बुला रही हैं…
यही वह भरोसे का जाल था, जिसमें एक बुजुर्ग महिला फंस गई। कम दिखाई देने और रिश्तेदार होने के भ्रम में वह बाइक पर बैठ गईं। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे रिश्तेदारों के नहीं, बल्कि अपराधियों के कब्जे में हैं। आरोपियों ने उन्हें पाटन बायपास के सुनसान इलाके में ले जाकर धमकाया, गहने उतरवाए, पर्स छीना और महिला को अकेला छोड़कर फरार हो गए।
सोने का मंगलसूत्र, चांदी की पायल, चूड़ियां और 15 हजार रुपए नकद… सब कुछ लुट गया। लेकिन सबसे बड़ी लूट शायद उस बुजुर्ग महिला के भरोसे की हुई, जो अब शायद किसी अनजान चेहरे पर विश्वास करने से पहले सौ बार सोचेगी।
उधर रांझी थाना क्षेत्र में बापूनगर खेरमाई मंदिर के पास जंगल में मिली युवक की लाश ने शहर को एक और डरावनी खबर दी। पेड़ के नीचे पड़ा शव, पीठ पर चोट के निशान और मौत के 10-12 घंटे पुराने होने की आशंका… ये सब केवल एक मामला दर्ज भर नहीं है। यह उस शहर की कहानी है, जहां अब सुनसान इलाके अपराधियों के सुरक्षित ठिकाने बनते जा रहे हैं।
पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, पहचान के प्रयास कर रही है, जांच जारी है… लेकिन जनता पूछ रही है कि आखिर अपराध होने के बाद की कार्रवाई ही व्यवस्था का अंतिम सच क्यों बन गई है? अपराध रोकने की तैयारी कहां है?
जबलपुर में बीते कुछ महीनों के भीतर हत्या, लूट, चाकूबाजी, सट्टा, बमबाजी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हर घटना के बाद वही बयान… आरोपियों की तलाश जारी है… लेकिन सवाल यह है कि क्या अपराधियों को अब यह भरोसा हो चुका है कि वे वारदात कर आसानी से निकल जाएंगे?

संस्कारधानी की पहचान अब डर और सनसनी से नहीं होनी चाहिए। लेकिन हालात यह हैं कि बुजुर्ग महिलाएं सड़क पर सुरक्षित नहीं, और युवक जंगलों में लाश बनकर मिल रहे हैं। शहर की जनता को अब केवल जांच नहीं, जवाब चाहिए।
आरती लोधी
डेस्क एडिटर

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