पशुपालन एवं दुग्ध व्यवसाय से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिले के चुटका परियोजना से विस्थापित होकर गोंझी में निर्मित पुनर्वास कॉलोनी में बसे परिवारों के जीवन को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक बनाने के उद्देश्य से प्रशासन एवं विभागीय अमला लगातार प्रयासरत है। पुनर्वास के साथ-साथ इन परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने की दिशा में भी गंभीर पहल की जा रही है, ताकि विस्थापित परिवार नए स्थान पर आर्थिक रूप से सशक्त होकर बेहतर जीवनयापन कर सकें।
इसी क्रम में पशु चिकित्सा एवं सेवाएं विभाग के उप संचालक डॉ. उग्रसेन तिवारी गोंझी पुनर्वास कॉलोनी पहुंचे और वहां निवासरत परिवारों से मुलाकात कर उन्हें पशुपालन एवं डेयरी आधारित रोजगार गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें रोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की।
ज्ञात हो कि कुछ दिन पूर्व पुनर्वास कॉलोनी में आकर बसे यादव परिवार ने कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे के समक्ष पशुपालन गतिविधियों में रुचि व्यक्त करते हुए इस क्षेत्र में कार्य करने की इच्छा जताई थी। परिवार की इसी इच्छा को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तत्काल पहल की और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर आवश्यक मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए।
इसके बाद उप संचालक डॉ. तिवारी स्वयं कॉलोनी पहुंचे और परिवारों को विभागीय योजनाओं एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी।
डॉ. तिवारी ने बताया कि शासन द्वारा पशुपालन एवं डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ लेकर विस्थापित परिवार स्वरोजगार स्थापित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कॉलोनी के परिवार संगठित होकर दुग्ध संघ का गठन करते हैं, तो इससे उन्हें नियमित आय का स्थायी माध्यम प्राप्त होगा। दुग्ध संघ के माध्यम से यहां उत्पादित दूध का संग्रहण सीधे कॉलोनी से किया जाएगा, जिसके लिए दुग्ध संघ का वाहन नियमित रूप से यहां पहुंचेगा। इससे परिवारों को बाजार तक पहुंचने की चिंता नहीं रहेगी और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य भी प्राप्त हो सकेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि पशुपालन केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई अन्य प्रकार के रोजगार भी विकसित किए जा सकते हैं। पशुओं के गोबर से कंडे एवं जैविक खाद तैयार कर अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह कार्य भविष्य में बेहतर आय का माध्यम बन सकता है। इसके अलावा दूध, दही, घी एवं अन्य दुग्ध उत्पादों का उपयोग परिवार स्वयं भी कर सकेंगे, जिससे उनके पोषण स्तर एवं स्वास्थ्य में सुधार आएगा।
इस दौरान परिवारों को पशुओं की देखभाल, टीकाकरण, चारे की व्यवस्था एवं डेयरी प्रबंधन से संबंधित आवश्यक जानकारियां भी दीं। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी विभाग द्वारा हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि विस्थापित परिवार आत्मनिर्भर बनकर सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें।
गोंझी पुनर्वास कॉलोनी में विभागीय अधिकारियों की इस पहल से विस्थापित परिवारों में उत्साह एवं आत्मविश्वास का वातावरण देखा गया। लोगों ने कहा कि पुनर्वास के साथ रोजगार की दिशा में मिल रहा सहयोग उनके नए जीवन की मजबूत शुरुआत साबित होगा।प्रशासन की यह पहल केवल पुनर्वास तक सीमित न रहकर विस्थापित परिवारों को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
