जिले में शराब माफियाओं का आतंक!आबकारी और पुलिस विभाग के सामने आखिर क्यों बौना साबित हो रहा प्रशासन?

Revanchal
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नांदिया घाट में खूनी खेल, राहगीरों पर जानलेवा हमला — कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल


दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले में शराब माफियाओं के बढ़ते आतंक ने अब आम जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अवैध शराब कारोबार, गांव-गांव फैलती पेकारी और शराब ठेकेदारों की कथित दबंगई अब इस कदर बढ़ चुकी है कि खुलेआम सड़कों पर लोगों पर हमला किया जा रहा है और जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बने हुए दिखाई दे रहे हैं।


ताजा मामला नांदिया घाट का है, जहां देर रात राहगीरों पर कथित रूप से शराब ठेकेदार से जुड़े युवकों द्वारा जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना नंबर की गाड़ियों में सवार 15 से 20 बदमाशों ने पहले रास्ता रोका, फिर गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। इस दौरान कई लोग घायल हुए, वाहनों में तोड़फोड़ की गई और मोबाइल तक तोड़ दिए गए।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नैनपुर से लौट रहे युवकों को घेरकर बेरहमी से पीटा गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कैसे हो गए कि उन्होंने बीच सड़क कानून को ही चुनौती दे डाली?


मंडला पुलिस ने मामले में शराब ठेकेदार सहित पांच लोगों के खिलाफ बलवा और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। घटना में इस्तेमाल तीन बोलेरो और कुछ दोपहिया वाहन जब्त किए गए हैं, जबकि दो आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। लेकिन सवाल केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित नहीं है, सवाल यह है कि आखिर ऐसी घटनाओं की जमीन तैयार किसने होने दी?


जिले में अवैध शराब का कारोबार लगातार फैलता जा रहा है। गांवों और नगरीय क्षेत्रों में लाइसेंसी दुकानों से ज्यादा शराब पेकारी के माध्यम से बेचे जाने के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। इसके बावजूद आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नजर आती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम शराब बिक रही है, युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही है, अपराध बढ़ रहे हैं और जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ रखकर कुंभकरणी नींद में आराम फरमाते दिखाई दे रहे हैं।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब माफियाओं को राजनीतिक और विभागीय संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। यही कारण है कि शराब कारोबारी अब खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। जिले में बढ़ती मारपीट, सड़क हादसे, घरेलू हिंसा और अपराधों के पीछे अवैध शराब कारोबार को बड़ा कारण माना जा रहा है।


सबसे ज्यादा सवाल आबकारी विभाग पर उठ रहे हैं। आखिर गांव-गांव तक शराब पहुंच कैसे रही है? पेकारी कौन करवा रहा है? बिना विभागीय मिलीभगत के अवैध शराब का इतना बड़ा नेटवर्क कैसे संचालित हो सकता है? यदि लगातार शिकायतें मिल रही थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?


उधर पुलिस विभाग भी सवालों के घेरे में है। जब जिले में शराब माफियाओं की दबंगई की चर्चाएं लंबे समय से हो रही थीं तो निगरानी और सख्त कार्रवाई पहले क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन किसी बड़ी वारदात का इंतजार कर रहा था?
अब जनता मांग कर रही है कि केवल मामूली कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे जिले में अवैध शराब नेटवर्क, पेकारी सिस्टम और शराब ठेकेदारों की गतिविधियों की उच्चस्तरीय जांच हो। साथ ही ऐसे लोगों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों और जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए।
फिलहाल मंडला जिले में एक ही सवाल गूंज रहा है —
क्या शराब माफिया अब कानून से भी ऊपर हो चुके हैं, या फिर प्रशासन अब कोई बड़ा और कठोर कदम उठाएगा?
क्या कहते है जिम्मेदार
घटना 19 तारीख की रात की 20 तारीख को थाना महराजपुर की घटना सामने आई हैं, जहाँ शराब ठेकेदार के लोग दो लोगों के साथ जान से मारने की कोशिश की गई घटना को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई और कुछ अपराधी को पकड़ लिया और कुछ तलाश जारी है विभिन्न धाराओं पर प्रकरण दर्ज कर जाँच जारी है और उपयोग हुए वाहनों को भी पुलिस जप्त कर लिए है जल्द ही सभी आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।


राजेश रघुवंशी
पुलिस अधीक्षक मंडला

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