गोपनीय सूचनाओं से लेकर भूमाफियाओं तक पहुंचाने के आरोपों से घिरा मामला
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले के नैनपुर स्थित उप पंजीयक कार्यालय एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विभागीय नियमों और पारदर्शिता को ताक पर रखकर वर्षों से एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को कार्यालय में प्रभावशाली भूमिका में बनाए रखा गया है। अब यह मामला केवल नौकरी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि कार्यालय की गोपनीय जानकारी, भूमाफियाओं से संबंध और भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण तक पहुंच चुका है।
वही सूत्रों से जानकारी के अनुसार जिला पंजीयक कार्यालय मंडला में उच्च पद पर पदस्थ मोनिका विश्वकर्मा के प्रभाव का लाभ उठाते हुए उनके भाई अचल विश्वकर्मा को लंबे समय से उप पंजीयक कार्यालय नैनपुर में सहायक के रूप में बनाए रखा गया। बताया जा रहा है कि वर्ष 2013-14 से 2017-18 तक सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करने के दौरान अचल विश्वकर्मा ने कार्यालय की कार्यप्रणाली और गोपनीय दस्तावेजों तक गहरी पकड़ बना ली थी।
आरोप यह भी हैं कि पूर्व पदस्थ अधिकारियों के साथ करीबी संबंधों का लाभ लेकर संबंधित व्यक्ति कार्यालय की संवेदनशील जानकारी बाहरी लोगों और कथित कालोनाइजरों तक पहुंचाता रहा। जबकि प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन लगातार अवैध कॉलोनाइजरों एवं भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नैनपुर, पिंडरई, चिरईडोंगरी और डिठौरी क्षेत्र में चल रहे कई विवादित मामलों में कथित संरक्षण देने के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो छोटे-छोटे भूखंडों को अवैध रूप से प्लाटिंग कर बेचने वाले लोगों को कार्यालय स्तर से जानकारी और सहयोग पहुंचाया जाता रहा, जिससे मोटी रकम का खेल चलता रहा। यही कारण है कि भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद कई लोग लगातार फलते-फूलते नजर आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को वर्षों तक एक ही कार्यालय में क्यों बनाए रखा गया? विभागीय नियमों के अनुसार संवेदनशील कार्यालयों में लंबे समय तक एक ही व्यक्ति की तैनाती भ्रष्टाचार और गोपनीयता के खतरे को बढ़ाती है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया?
यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि वर्ष 2018 के बाद भी अचल विश्वकर्मा को लगातार कलेक्टर रेट पर उप पंजीयक कार्यालय में सहायक के रूप में पदस्थ रखा गया। आखिर ऐसी कौन-सी विशेष योग्यता है जिसके चलते विभाग किसी अन्य कर्मचारी की नियुक्ति नहीं कर पाया?
वही मामले में यह आरोप भी गंभीर हैं कि कार्यालय की गोपनीयता और गरिमा को व्यक्तिगत लाभ के लिए दांव पर लगाया गया। यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि शासन व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिन्ह है।
अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन, पंजीयन विभाग और शासन स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह भी जांच हो कि वर्षों से एक ही व्यक्ति को संरक्षण किसके आदेश पर मिलता रहा और किन अधिकारियों की भूमिका इसमें संदिग्ध रही।
जनता के बीच अब एक ही सवाल गूंज रहा है —
आखिर उप पंजीयक कार्यालय नैनपुर में एक दैनिक वेतनभोगी पर इतनी मेहरबानी क्यों?
