अजब मंडला की गजब कहानी स्कूली छात्रो से करवाली मजदूरी, मंडला में मनरेगा बना “लूट का जरिया

Revanchal
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ग्राम पंचायत रेवाड़ा में फर्जी हाजिरी से पैसा निकालने का मामला, जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?

दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में विकास योजनाएं अब सवालों के घेरे में हैं। खासकर मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जिसका उद्देश्य गरीबों को रोजगार देना है, वही अब कथित रूप से भ्रष्टाचार का माध्यम बनती जा रही है। ग्राम पंचायत रेवाड़ा में सामने आया मामला इस पूरे सिस्टम की पोल खोल रहा है।


यहां आरोप है कि सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री की मिलीभगत से खुलेआम फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। नियम-कायदे को ताक पर रखकर कागजों में मजदूरी दिखाकर शासकीय राशि का आहरण किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।


छात्र को बना दिया मजदूर!
सबसे चौंकाने वाला मामला यह है कि एक स्कूली छात्र के नाम पर ही मजदूरी दिखा दी गई। जबकि वह छात्र परीक्षा केंद्र में उपस्थित था, उसी दौरान पंचायत के रिकॉर्ड में उसे निर्माण कार्य में मजदूरी करते दिखाया गया और उसके नाम से भुगतान भी निकाल लिया गया।


क्या सब कुछ “सेटिंग” से चल रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर हो रहे इस तरह के फर्जीवाड़े को जनपद पंचायत और जिला पंचायत में बैठे जिम्मेदार अधिकारी नजरअंदाज कर रहे हैं। जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है, जिससे दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।


विकास के नाम पर लूट?
यह सवाल अब उठने लगा है कि क्या मंडला जिले में विकास योजनाएं वास्तव में जनता के लिए हैं या फिर कुछ लोगों के लिए “कमाई का जरिया” बन गई हैं? अगर एक छात्र तक को नहीं छोड़ा जा रहा, तो बाकी योजनाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।


जांच या सिर्फ दिखावा?
बार-बार शिकायतों के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे या फिर एक बार फिर फाइलों में दबा दिया जाएगा?


जनता की मांग
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो
दोषियों से राशि की वसूली की जाए
संबंधित सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री पर आपराधिक मामला दर्ज हो
और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त निगरानी की व्यवस्था की जाए

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