मेडिकल कॉलेज, डिडौरी-मंडला रोड, आईटीआई-छात्रावास समेत दर्जनों प्रोजेक्ट्स अधर में!
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। आदिवासी बाहुल्य जिले में नेता अधिकारी कर्मचारी हुए सुस्त, ठेकेदारों के राज में जिले का विकास ठप! समय-सीमा, गुणवत्ता और कानून सब धरी-धरी रह गए। लाखों-करोड़ों का जनता का पैसा पानी में बह रहा है, लेकिन प्रशासन के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। ठेकेदार बेखौफ, मनमर्जी से काम चला रहे हैं – न समय का ध्यान, न मटेरियल की क्वालिटी, न नियम-कानून का पालन।
मेडिकल कॉलेज मंडला – सपनों का कत्ल! दो साल पहले ठेका दिया गया, प्राचार्य ने मुंह खोलकर कहा था – “दो वर्ष में बनाकर दे देंगे”। लेकिन आज भी निर्माण धीमी गति से चल रहा है। ठेकेदार का एक ही जवाब – “शीघ्र होगा”। ई-साहब ने भी फटकार लगाई, फिर भी काम ठेके की राह पर!
मजदूरों को पेमेंट नहीं, काम रुक-रुककर। एमडी तक सख्त हो चुके हैं, 10 महीने का अल्टीमेटम दिया – लेकिन ठेकेदार अभी भी अपनी “ठरी” में मस्त! सरकार का मेडिकल कॉलेज का सपना ठेकेदार की लापरवाही से चूर-चूर।
मंडला-डिडौरी (डिंडौरी) टू-लेन हाईवे – सफर का सत्यानाश* 492 करोड़ की इस नेशनल हाईवे पर डेढ़ साल से काम चल रहा है, लेकिन ठेका कंपनी की मनमानी से कछुआ चाल! लापरवाह निर्माण, घटिया मटेरियल, समय-सीमा की धज्जियां उड़ाई गईं। कलेक्टर ने औचक निरीक्षण किया, लेकिन ठेकेदार बेपरवाह। जनता रोजाना खराब सड़क पर जान जोखिम में डाल रही है – दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया।
आईटीआई भवन, छात्रावास और सदीपिनी शाला – घटिया निर्माण का बाजार* जनपद पंचायत मोहगांव में 11 करोड़ 61 लाख की लागत से आईटीआई भवन + 60 सीट वाले लड़के-लड़कियों के छात्रावास + क्वार्टर बन रहे थे। लेकिन गुणवत्ता शून्य! 2 करोड़ से ज्यादा के छात्रावास में घटिया सामग्री पकड़ी गई तो कांग्रेस विधायक चैन सिंह बरकड़े ने काम रुकवा दिया। ठेकेदार ने घटिया मटेरियल डालकर जनता को ठगने की कोशिश की।
सदीपिनी शाला भवन, आरडी कॉलेज, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत दर्जनों सड़कें, पुल-पुलिया, सरकारी भवन – हर जगह यही कहानी। ठेकेदार समय-सीमा का उल्लंघन कर रहे हैं, PWD नियम-कानून ताक पर रख दिए गए।
और भी निर्माण कार्यों में घोर अनियमितता!
पीएचई के एफएचटीसी (घरेलू नल कनेक्शन) कार्यों में लापरवाही, ठेकेदारों को नोटिस तक जारी।
एमपीबीडीसी के तहत कई भवनों में भ्रष्टाचार के आरोप, अधिकारी सस्पेंड हो चुके।
बसनिया बांध, चुटका परियोजना से जुड़े सहायक कार्य भी ठेकेदारों की लेटलतीफी का शिकार। जिले में सैकड़ों करोड़ के विकास कार्य लटके पड़े हैं। ठेकेदार बेलगाम क्योंकि प्रशासन की कार्रवाई शून्य!
कानून क्या कहता है? ठेकेदारों पर गाज गिरनी चाहिए सार्वजनिक निर्माण अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान – समय-सीमा लांघने पर पेनाल्टी, ब्लैकलिस्टिंग, FIR। घटिया मटेरियल पर ब्लैक लिस्टिंग, ठेका रद्द। लेकिन मंडला में ये सब कागजी शेर बन गए। प्रशासन की नींद क्यों? कलेक्टर-एसपी-पीडब्ल्यूडी अधिकारी क्यों चुप? जनता का पैसा लुट रहा है, युवाओं का भविष्य (मेडिकल कॉलेज, आईटीआई) अंधेरे में।
जनता की मांग – तुरंत कार्रवाई!
सभी लेट ठेकेदारों पर तत्काल पेनाल्टी लगाओ, ठेके रद्द करो।
ब्लैकलिस्टिंग की लिस्ट जारी करो।
गुणवत्ता जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित करो।
प्रशासनिक अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय करो।
मंडला जिले के विकास को ठेकेदारों की लूट से बचाओ! प्रशासन जागो, वरना जनता सड़कों पर उतरने को तैयार है। यह लापरवाही अब सहन नहीं होगी – ठेकेदारों की मनमानी का अंत हो!
